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एमएसएमई सेक्टर ने जताया ऐतराज

नोएडा में मजदूरी बढ़ोतरी का ऐलान, 21 फीसदी इजाफे पर MSME सेक्टर में नाराजगी

नोएडा में मजदूरी को लेकर चल रहे श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य की योगी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 21% तक की वृद्धि का ऐलान किया है। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

नोएडा में मजदूरी बढ़ोतरी का ऐलान 21 फीसदी इजाफे पर msme सेक्टर में नाराजगी

Noida 21 percent Wage Hike Sparks MSME Concerns |

नोएडा (यूपी)। उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरी को लेकर चल रहे श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य की योगी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 21% तक की वृद्धि का ऐलान किया है। मजदूरी में यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। नोएडा की डीएम मेघा रूपम ने एक संदेश में इसका ऐलान किया।

बड़े उद्योगों का समर्थन, MSME की बढ़ी चिंता

दिल्ली एनसीआर में मजदूरी में लागू की जा रही इस बढ़ोतरी का कुछ बड़े उद्यमियों ने स्वागत करते हुए इसपर सहमति दे दी है। लेकिन लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) सेक्टर के उद्यमी इसे एक तरफा फैसला करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक माहौल को देखते हुए इस फैसले से वे पहले से संकट में हैं। इस फैसले से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उनका कारोबार ठप हो सकता है।

MSME पर आर्थिक संकट का साया

एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने सरकार के इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा है कि इस मसले पर किसी ऐलान से पहले एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों को भी सुना जाना चाहिए था। उन्होंनेे कहा कि पिछले कुछ समय से अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया युद्ध के कारण एमएसएमई सेक्टर की हालत पहले ही खराब हैं। ऐसे में अचानक 21 प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी की मार एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ी बाधा बनकर उभरेगी। इस पर सरकार को पुर्नविचार करने की जरूरत है।

सरकार से राहत पैकेज की मांग

एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों का कहना है कि सरकार इस वेतनमान को लागू कराने से पहले एमएसएमई सेक्टर के लिए भी बूस्टर डोज देने की दिशा में कदम बढ़ाए। नए वेतनमान के फैसले से एमएसएमई उद्योग को कई गुना घाटा होगा। इससे उबरने के लिए सरकार ने कोई ठोस पहल की घोषणा नहीं की है। इस तरह का एकतरफा फैसला मानने योग्य नहीं हैं।

उद्योग संगठनों ने फैसले को बताया एकतरफा

आइईए गौतमबुद्ध नगर, अध्यक्ष संजीव शर्मा ने सरकार ने दबाव में आकर एकतरफा निर्णय लिया है। 21 प्रतिशत का अतिरिक्त भार एमएसई सेक्टर झेलने की स्थिति में नहीं हैं। पहले ही एमएसएमई सेक्टर टैरिफ व पश्चिम एशिया युद्ध के कारण हुए नुकसान से नहीं उबर पाया है। ऐसे में अचानक 21 प्रतिशत का भार नहीं सहा जा सकता।

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