कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने व उन पर हमले...
चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना पुलिस को जुलूस-सभा के लिए स्वीकृति देने की मनाही |
कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने व उन पर हमले, कोलकाता के भवानीपुर में विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी के नामांकन पत्र दाखिल करने के दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं व भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने विरोध-प्रदर्शन और हंगामा समेत कई घटनाओं को देखते हुए सख्ती बरतने का रवैया अख्तियार किया है।
पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की दयनीय हालत
अब मुख्य चुनाव अधिकारी की इजाजत के बिना पुलिस किसी को जुलूस-सभा करने की स्वीकृति नहीं देगी। सूत्रों के मुताबिक, मालदा की घटना के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट की ओर से पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की दयनीय हालत और प्रशासन व पुलिस प्रशासन के शिथिलता पर जाहिर की गई चिंता के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल से मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का हर उपाय करने पर जोर दिया।
एफआईआर दर्ज की प्रक्रिया हुई शुरू
उन्होंने सभा-जुलूस पर निगरानी रखने पर कड़ा कदम उठाने का निर्देश दिया है। उनका स्पष्ट आदेश है कि प्रशासन और पुलिस प्रशासन के किसी भी अधिकारी की ओर से की जाने वाली लापरवाही होने की तुरंत रिपोर्ट की जाए। चुनाव आयोग के कड़ा रूख के बाद ही विभिन्न पिछली घटनाओं से संबंद्ध एफआईआर दर्ज की प्रक्रिया शुरू हुई। चुनाव आयोग की ओर से यह भी व्यवस्था की जा रही है कि बूथ में वोट के दौरान सीसीटीवी कुछ समय के लिए भी बंद हुआ तो उस बूथ पर फिर से चुनाव कराने पर विचार किया जाएगा।
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