सतना जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। सतना-चित्रकूट मार्ग पर स्थित प्रदेश का एकमात्र दुर्लभ 'पीला पलाश' (Yellow Palash) का पेड़ अब सड़क विकास की भेंट चढ़ सकता है।
सतना/चित्रकूट (एमपी)। मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। सतना-चित्रकूट मार्ग पर स्थित प्रदेश का एकमात्र दुर्लभ 'पीला पलाश' (Yellow Palash) का पेड़ अब सड़क विकास की भेंट चढ़ सकता है। सतना-चित्रकूट फोरलेन सड़क निर्माण के चलते इस वृक्ष को हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। इससे पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश और चिंता फैल गई है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने मुख्यमंत्री से इस पेड़ को बचाने की गुहार लगाई है।
विशेषज्ञ का सुझाव, टिशू कल्चर से करें संरक्षण
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि यदि पेड़ को हटाना अनिवार्य है तो टिश्यू कल्चर के माध्यम से इसके संरक्षण और पुनरुत्पादन के प्रयास किए जाने चाहिए। मध्य प्रदेश में पलाश के पेड़ आमतौर पर केसरिया (नारंगी) फूलों के लिए जाने जाते हैं, जिन्हें 'जंगल की आग' (Flame of the Forest) भी कहा जाता है। सतना के चितहरा मोड़ के पास स्थित यह विशेष पलाश का पेड़ अपने पीले फूलों के कारण बेहद दुर्लभ और प्रदेश का इकलौता माना जाता है।
वर्तमान में इस क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। विकास की इस दौड़ में इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर के अस्तित्व पर तलवार लटक गई है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसी दुर्लभ प्रजातियों को नष्ट करना प्रकृति के साथ खिलवाड़ होगा।
संरक्षण की मांग हुई तेज
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस पेड़ को बचाने के लिए अभियान शुरू हो गया है। मांग की जा रही है कि या तो सड़क के नक्शे में थोड़ा बदलाव किया जाए ताकि पेड़ सुरक्षित रहे, या फिर आधुनिक तकनीक (Tree Translocation) का उपयोग कर इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, इसके बीजों और टिश्यू कल्चर की मदद से नई पौध तैयार करने की सलाह भी दी जा रही है ताकि यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्त न हो।
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