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विचाराधीन मतदाताओं के भविष्य पर अनिश्चितता

सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते तय होगा विचाराधीन वोटरों का भाग्य

सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के तहत पश्चिम बंगाल के विचाराधीन वोटर से संबद्ध मालमों की सुनवाई में यह साफ नहीं हो पाया कि विचाराधीन वोटर इस विधानसभा में वोट दे पाएंगे या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते तय होगा विचाराधीन वोटरों का भाग्य

SC to Decide Fate of Undecided Voters Next Week |

कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के तहत पश्चिम बंगाल के विचाराधीन वोटर से संबद्ध मालमों की सुनवाई में यह साफ नहीं हो पाया कि विचाराधीन वोटर इस विधानसभा में वोट दे पाएंगे या नहीं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश दिए जाने पर चुनाव आयोग विचाराधीन वोटरों को इस बार विधानसभा चुनाव वोट का अधिकार दे सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। वह अगले सप्ताह में सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच वोटर पिस रहे हैं। एसआईआर पूरो हो और सुचारू रुप से चुनाव हो इसलिए न्यायिक अधिकारियों से मदद ली जा रही है। सुप्रीम कोर्ट सख्ता है कि न्यायिक अधिकारियों को ब्लैकमेल नहीं किया जाए और ना ही उन्हें टारगेट किया जाए।

पासपोर्ट वाले वोटरों को जाना होगा अपीलेट ट्रिब्यूनल

सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन वोटरों से संबद्ध मामले के आलावा और दो मामलों पर सुनवाई की। पासपोर्ट वाले वोटरों ने अपील की कि उनके पास पासपोर्ट है फिर भी उन्हें वोटर होने से अलग कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट वाले वोटरों के मामले में हस्तक्षेप नहीं किया और उन्हें अपीलेट ट्रिब्यूनल में जाने के लिए कहा। दूसरा मामला मालदा के मोथाबाडी में न्यायिक अधिकारियों (सेवानिवृत जज) को बंधक बनने और उन पर हुए हमले के बारे में एनआईए द्वारा जांच रिपोर्ट का था। एनआईए ने और तीन लोगों को गिरफ्तार होने के जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट ने उसे गिरफ्तार किए गए लोगों का राजनीतिक पृष्ठभूमि का पता करने का आदेश दिया। एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट तो जानाकारी दी कि घटना को पहले से योजना बनाकर अंजाम दिया गया था।

फाइनल वोटर लिस्ट और ट्रिब्यूनल की चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने वोटरों की जो फाइनल सूची जारी की है, उसमें जिन वोटरों का नाम है, वे विधानसभा चुनाव में वोट देंगे। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने आज से विचाराधीन वोचरों के मामले की सुनवाई कर रहा है। उसे करीब 40 लाख मामले की सुनवाई करना है। वोट के दिन तक उसके द्वारा जिन मामलों का निपटारा हो जाएगा, वे वोटर वोट दे पाएंगे या नहीं, इस पर सुप्रीम की ओर से स्पष्ट आदेश नहीं हुआ है।

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