केन्द्र सरकार द्वारा आम आदमी को मंहगाई से राहत देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में की गयी कमी के कारण उत्तर प्रदेश सरकार की कमाई में कमी आई है।
लखनऊ (यूपी)। केन्द्र सरकार द्वारा आम आदमी को मंहगाई से राहत देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में की गयी कमी के कारण उत्तर प्रदेश सरकार की कमाई में कमी आई है। जीएसटी दरें कम होने से जीएसटी के माध्यम से होने वाली आय अस्थायी रूप से प्रभावित हुई, लेकिन अन्य विभागों के बेहतर प्रबंधन से कुल कमाई बढ़ी है। इससे राज्य सरकार के कुल राजस्व संग्रह में इस दौरान बढ़ोत्तरी हुई है।
लक्ष्य से कम, लेकिन कुल संग्रह बढ़ा
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्य को वित्त वर्ष 25-26 में करीब 1.15 लाख करोड़ का राजस्व मिला, जबकि वित्त वर्ष 24-25 में जीएसटी से कुल आय करीब 1.14 लाख करोड़ की प्राप्ति हुई थी। ये राजस्व संग्रह पिछली बार से भले ही 1000 करोड़ रुपये ज्यादा है लेकिन निर्धारित लक्ष्य का सिर्फ 65.8% ही है। हालांकि, प्रदेश के कुल राजस्व संग्रह में 10228 करोड़ का रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। मालूम हो कि केन्द्र सरकार ने गत वर्ष सितंबर में जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था। साथ ही कई वस्तुओं पर जीएसटी की दरें 28% से घटाकर 18% कर दी थीं। हाइब्रिड वाहनों पर भी जीएसटी को 43% से कम कर 40% और चमड़े, जूते, कपड़ा, हस्तशिल्प और खिलौनों पर जीएसटी को घटाकर 5% कर दिया गया था।
बेहतर प्रबंधन से बनी मजबूत स्थिति
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधान भवन स्थित अपने कक्ष में बताया कि जीएसटी में राजस्व संग्रह कम होने के बावजूद वित्तीय अनुशासन, प्रभावी नीतियों और सुदृढ़ प्रशासनिक प्रबंधन से राज्य सरकार के कुल राजस्व संग्रह में वृद्धि हुई है। राज्य अब 35000 करोड़ से अधिक रेवेन्यू सरप्लस के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 223060 करोड़ का राजस्व मिला।
दूसरे स्रोतों से हुई भरपाई
यह राजस्व पिछले वर्ष के 212832 करोड़ के मुकाबले 10228 करोड़ ज्यादा है। मार्च में जीएसटी से 7347.31 करोड़ मिले जो पिछले वर्ष 6785.34 करोड़ थी। अक्टूबर 2025 के कर आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी दरों में बड़ी कटौती के कारण यूपी के जीएसटी संग्रह में कुछ महीनों तक सुस्ती रही। जीएसटी में कमी की भरपाई के लिए सरकार ने शराब की बिक्री (आबकारी), स्टाम्प एवं निबंधन और परिवहन राजस्व में बढ़ोतरी के जरिए 35 हजार करोड़ से अधिक का सरप्लस बजट हासिल किया।
खर्च और भविष्य की तैयारी
आबकारी से 9269.44. करोड़ मिले, पिछले वर्ष के 9744.50 करोड़ मिले थे। उन्होंने बताया कि स्टांप एवं निबंधन में राज्य को 2728.74 करोड़ का राजस्व मिला। पिछले वर्ष 2617.56 करोड़ मिले थे। वित्त मंत्री ने बताया कि परिवहन क्षेत्र में 1624.84 करोड़ और भू-तत्व एवं खनिकर्म से 784.41 करोड़ राजस्व मिला है। खन्ना ने बताया कि वर्ष 25-26 में मूल बजट का 81% खर्च किया जा चुका है। उन्होंने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी कार्य योजना को शीघ्र अंतिम रूप दें ताकि विकास कार्य समय से पूरे हों।
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