जम्मू और कश्मीर के बडगाम में शिया समुदाय के लोगों ने शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया।
बडगाम (जम्मू और कश्मीर)। जम्मू और कश्मीर के बडगाम में शिया समुदाय के लोगों ने शनिवार को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने ईरान पर हुए इस हमले को "अमानवीय और अन्यायपूर्ण" बताते हुए इसके विरोध में नारे लगाए। उन्होंने भारत से भी इस हमले की निंदा करने की मांग की।
भारत सरकार से निंदा की अपील
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि, "अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अन्यायपूर्ण हमला किया। हमने ईरान की सुरक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन किया। भारत की विदेश नीति में बदलाव नहीं होना चाहिए। भारत को इसकी निंदा भी करनी चाहिए।" एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, "यह मानवता के खिलाफ है। हम देख रहे हैं कि इज़राइल गाजा में बच्चों को मार रहा है। ईरान ने इसका विरोध किया है और इसीलिए वे ईरान पर हमला कर रहे हैं। हम ईरान की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।"
कांग्रेस ने की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना
इस बीच, कांग्रेस ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों की निंदा की है और केंद्र से पश्चिम एशिया में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। कांग्रेस सांसद और संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी आलोचना करते हुए ईरान के साथ परमाणु समझौते की बातचीत को "ढोंग" बताया। उन्होंने ईरान पर हुए हमलों में अमेरिका की संलिप्तता का कारण इजरायल को उकसाना बताया।
जयराम रमेश का ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा निशाना
जयराम रमेश ने लिखा कि, "राष्ट्रपति ट्रम्प ने हफ्तों तक ईरान के साथ कूटनीति और बातचीत का ढोंग किया। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के कट्टरपंथियों के उकसावे पर उन्होंने सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से एक सैन्य अभियान शुरू किया है। भारतीय कांग्रेस इस हमले की निंदा करती है और भारत सरकार से आग्रह करती है कि वह इस संघर्ष को तत्काल समाप्त करने में मदद करे। भारत सरकार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में रहने और काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए।"
'ऑपरेशन रोरिंग लायन' और ईरान की घेराबंदी
गौरतलब है कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया, जिसका कोडनेम ऑपरेशन रोरिंग लायन था। इसमें सैन्य स्थलों, मिसाइल उत्पादन सुविधाओं और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास के क्षेत्रों को निशाना बनाया गया था।
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