कांग्रेस पार्टी की एक महिला पार्षद ने इंदौर नगर निगम के बजट पर चर्चा के दौरान 'वंदे मातरम' गाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
इंदौर (मध्य प्रदेश)। कांग्रेस पार्टी की एक महिला पार्षद ने इंदौर नगर निगम के बजट पर चर्चा के दौरान 'वंदे मातरम' गाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला 8 अप्रैल बुधवार का है जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम बजट को लेकर चल रहे बैठक में देरी से पहुंचीं। जानकारी के मुताबिक भाजपा पार्षदों ने उनसे 'वंदे मातरम' गाने को कहा, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया।
सदन में हंगामा, अध्यक्ष ने पार्षद को किया निलंबित
कांग्रेस पार्षद के 'वंदे मातरम' गाने से इनकार करने पर भाजपा पार्षदों ने हंगामा किया और नारे लगाए। बाद में, अध्यक्ष मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख अलीम को एक दिन के लिए बैठक से निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा कि, "वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे हो चुके हैं और केंद्र सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं कि इसे सभी सरकारी कार्यालयों में गाया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम उस समय अनुपस्थित थीं जब 'वंदे मातरम' गाया जा रहा था। वे बाद में सदन में आकर कार्यवाही में बाधा डालने लगीं। जब सदस्यों ने बताया कि उन्हें उस समय उपस्थित रहना चाहिए था तो उन्होंने गीत के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। गीत के बारे में उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के कारण उन्हें एक दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया गया है।"
बचाव में उतरीं साथी पार्षद रुबीना खान
इसी बीच, एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने अलीमा का बचाव करते हुए कहा कि वे पिछले 15 वर्षों से अलीम के साथ पार्षद रही हैं और वे हमेशा 'वंदे मातरम' गाती रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उस विशेष दिन क्या हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि, "फौजिया शेख अलीम बोल रही थीं और मुझे उस संदर्भ की जानकारी नहीं है जिसमें उन्होंने यह बात कही, लेकिन उन्होंने कहा कि वह 'वंदे मातरम' नहीं गाएंगी। इसके बाद, सदन में हंगामा शुरू हो गया और अध्यक्ष ने उन्हें एक दिन के लिए निष्कासित कर दिया। मैं पिछले 15 वर्षों से फौजिया शेख अलीम के साथ पार्षद रही हूं। वे हमेशा 'वंदे मातरम' गाती रही हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि आज क्या हुआ।"
राष्ट्रगीत को लेकर सम्मान की बात
रुबीना इकबाल खान ने कहा कि वे 'वंदे मातरम' के समय उपस्थित थीं और हमेशा इसे गाती और इसका सम्मान करती रही हैं। किसी भी आपत्ति का कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि यह राष्ट्रगीत है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति क्यों होगी।
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