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प्रमोटरों को अब 3 अलग-अलग खाते खोलना अनिवार्य

यूपी रेरा ने रियल स्टेट डेवलपर्स पर कसा शिकंजा

रियल एस्टेट में निवेशकों के धन का दुरूपयोग रोकने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने प्रमोटरों के बैंक खातों के संचालन व बैंकिंग रेगुलेशंस में बड़े बदलाव का फैसला किया है।

यूपी रेरा ने रियल स्टेट डेवलपर्स पर कसा शिकंजा

यूपी रेरा ने रियल स्टेट डेवलपर्स पर कसा शिकंजा

रियल एस्टेट प्रमोटरों को अब 3 अलग-अलग खाते खोलना होगा अनिवार्य

लखनऊ। 
रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेशकों के धन का दुरूपयोग रोकने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने प्रमोटरों के बैंक खातों के संचालन व बैंकिंग रेगुलेशंस में बड़े बदलाव का फैसला किया है। यूपी रेरा ने तीन हजार से अधिक पंजीकृत प्रमोटरों पर शिकंजा कसते हुए आदेश दिया कि हर प्रमोटर को अब बैंकों में तीन अलग-अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य होगा। साथ ही प्रमोटर खाते का संचालन तभी कर पाएगा जब यूपी रेरा में पंजीकरण हो जाएगा। इस कदम से भूखंड, फ्लैट या दुकान खरीदारों से मिलने वाली 70 प्रतिशत धनराशि की सुरक्षा हो सकेगी

यूपी रेरा ने रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और खरीदारों के पैसे के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं। राजधानी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय में बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में बताया गया कि अब हर रेरा पंजीकृत परियोजना के लिए बिल्डरों को तीन अलग-अलग बैंक खाते खोलना अनिवार्य होगा। इनमें कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट शामिल हैं।

नए नियमों के तहत खरीदारों से मिलने वाली राशि का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा प्रतिदिन स्वतः सेपरेट अकाउंट में ट्रांसफर होगा। इस राशि का उपयोग केवल जमीन खरीद और निर्माण कार्यों में ही किया जा सकेगा। सेपरेट अकाउंट से पैसा निकालने के लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाणपत्र जरूरी होंगे। 

बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि किसी भी परियोजना के बैंक खाते में बदलाव तभी मान्य होगा, जब यूपी रेरा की अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। केवल प्रारंभिक अनुमति के आधार पर नया खाता संचालित नहीं किया जा सकेगा। प्रमोटर के सेपरेट अकाउंट से किसी भी प्रकार की निकासी आर्किटेक्ट, इंजीनियर व चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी तीन अनिवार्य प्रमाणपत्रों के आधार पर ही होगी। बैंकों को निर्देशित किया गया कि वे परियोजना खातों पर किसी भी प्रकार का लियन, चेकबुक, डेबिट कार्ड या ट्रांजैक्शन आधारित नेट बैंकिंग सुविधा उपलब्ध न कराएं।

उन्होंने बताया कि जिन परियोजनाओं का पंजीकरण खत्म या निरस्त हो चुका है, उनके खातों को तुरंत फ्रीज किया जाएगा। प्राधिकरण ने यह भी साफ किया कि बिल्डर खरीदारों को दिए जाने वाले गारंटीड रिटर्न या अन्य निवेश लाभ का भुगतान परियोजना में जमा खरीदारों के पैसे से नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा अब प्रमोटर्स को हर तीन महीने में परियोजना की वित्तीय जानकारी शपथ पत्र के साथ यूपी रेरा पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। परियोजना पूर्ण होने और आरडब्ल्यूए को कॉमन एरिया हस्तांतरित करने के बाद ही सेपरेट अकाउंट बंद किया जा सकेगा।

बैठक में यूपी रेरा के सचिव महेंद्र वर्मा, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तर प्रदेश के अंचल प्रमुख व संयोजक शैलेंद्र कुमार सिंह, यूपी रेरा के प्रमुख सलाहकार अबरार अहमद, फाइनेंस कंट्रोलर प्रकाश सिंह, फाइनेंशियल एडवाइजर सुधांशु त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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