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नेपाल की सियासत में बालेन शाह का उदय

17 साल में बदलीं 14 सरकारें, क्या बालेन शाह नेपाल को दे पाएंगे राजनीतिक स्थिरता?

कल तक जो हाथ माइक थामे रैप की धुनों पर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, आज वही बालेन शाह नेपाल की सत्ता के नए 'पोस्टर बॉय' बनकर उभरे हैं।

17 साल में बदलीं 14 सरकारें क्या बालेन शाह नेपाल को दे पाएंगे राजनीतिक स्थिरता

फाइल फोटो |

काठमांडू (नेपाल)। नेपाल की धरती से एक ऐसी गूंज उठी है जिसने काठमांडू से लेकर दिल्ली और बीजिंग तक हलचल बढ़ा दी है। कल तक जो हाथ माइक थामे रैप की धुनों पर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर रहे थे, आज वही बालेन शाह नेपाल की सत्ता के नए 'पोस्टर बॉय' बनकर उभरे हैं। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि नेपाल की पुरानी सियासत के ढहते किलों और 'जेन-जी' (Gen Z) के नए भरोसे की कहानी है। हालांकि, बालेन शाह की राजनीति में एंट्री अपने साथ कई सवाल लेकर आई है। भारत-नेपाल संबंधों के संदर्भ में बात करें तो सवाल उठता है कि क्या बालेन का 'नेपाल फर्स्ट' वाला राष्ट्रवाद दिल्ली के साथ रिश्तों में नई गर्माहट लाएगा या दूरियां बढ़ाएगा?

मेयर से राष्ट्रीय नेता बनने की कठिन परीक्षा

बालेन शाह के लिए एक सफल नेता के तौर पर खुद को साबित करना एक बड़ी चुनौती होगी। नेपाल एक ऐसा देश है, जहाँ 2008 में राजतंत्र समाप्त होने के बाद से अब तक 17 साल में 14 सरकारें आकर जा चुकी हैं; ऐसे में देश को राजनीतिक स्थिरता देना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। शाह के राजनीतिक अनुभव की बात करें तो उन्होंने 30 मई 2022 से 18 जनवरी 2026 तक काठमांडू के 15वें मेयर के रूप में कार्य किया है। वे काठमांडू के महापौर के रूप में चुने जाने वाले पहले निर्दलीय उम्मीदवार थे। हालांकि, उनके पास अभी राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का कोई (विशेष) अनुभव नहीं है।

युवाओं का विद्रोह: पुरानी पार्टियों को करारा झटका

गौरतलब है कि नेपाल के आम चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 129 में से 100 सीटें जीतकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसे तोड़ने में पुरानी पार्टियों को सदियां लगेंगी। साल 2022 में जब बालेन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था, तब इसे महज एक 'तुक्का' माना गया था। लेकिन साल 2025 के 'Gen-Z आंदोलन' ने साबित कर दिया कि युवाओं का सब्र अब टूट चुका है। भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता ने केपी शर्मा ओली और शेर बहादुर देउबा जैसे दिग्गज नेताओं को नकार कर बालेन के 'भ्रष्टाचार मुक्त' वादे पर मुहर लगा दी है।

अस्थिर राजनीति का इतिहास और बदलाव की उम्मीद

नेपाल की राजनीति का सबसे बड़ा सच 'अस्थिरता' है। साल 2008 में नेपाल में राजतंत्र समाप्त हुआ और लोकतंत्र की स्थापना हुई। लोगों को अपनी पसंद की सरकार चुनने का अधिकार तो मिला, लेकिन चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। गठबंधन सरकारों के दौर में 17 साल में 14 सरकारें बनीं, लेकिन ये सरकारें देश को स्थिरता नहीं दे सकीं। जल्दी-जल्दी सरकारों के बनने और गिरने के बीच स्थितियां और बिगड़ती गईं। भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी बेकाबू हो गए और नेपाल समस्याओं के भंवरजाल में फंसता गया। इसी का परिणाम 2025 का 'Gen-Z आंदोलन' था, जिसने आगे चलकर काफी हिंसक रूप ले लिया। इतना ही नहीं, 1948 से अब तक 7 बार संविधान बदला या लागू किया गया है। पिछले 17 सालों में नेपाल ने 14 प्रधानमंत्री देखे हैं, यानी हर 14-15 महीने में एक नया चेहरा।

बालेन शाह का भारत से संबंध

भले ही राजनीतिक मंचों पर बालेन भारत के खिलाफ कड़े रुख में दिखें, लेकिन उनका व्यक्तिगत जुड़ाव भारत से बहुत गहरा है। 35 वर्षीय बालेन शाह ने भारत की विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (M.Tech) की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने बेंगलुरु के निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से भी पढ़ाई की है। उनका यह 'इंडिया कनेक्शन' भविष्य में भारत के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत में एक 'कॉमन ग्राउंड' या सेतु (Bridge) का काम कर सकता है।

बालेन शाह की जीत का भारत-नेपाल रिश्तों पर असर

बालेन शाह एक कट्टर राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं। वे 'नेपाल फर्स्ट' की बात करते हैं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर भारत की 'बिग ब्रदर' वाली भूमिका की आलोचना कर चुके हैं। चाहे 1806 की सुगौली संधि का विरोध हो या 'आदिपुरुष' फिल्म पर बैन की मांग, बालेन ने दिखाया है कि वे अपनी शर्तों पर राजनीति करेंगे। हालांकि, व्यावहारिक रूप से बालेन जानते हैं कि नेपाल की अर्थव्यवस्था और व्यापार के लिए भारत को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। संभव है कि वे शुरुआत में अपनी राष्ट्रवादी छवि चमकाने के लिए सख्त बयान दें, लेकिन सरकार चलाने के लिए उन्हें भारत के साथ व्यापारिक और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना ही होगा। ऐसे में रिश्तों में थोड़ी 'तल्खी और गर्माहट' का मिला-जुला दौर देखने को मिल सकता है।

भारत-नेपाल संबंध: दोस्ती या तल्खी?

मेयर रहते हुए बालेन ने अपने कार्यालय में नेपाल का वह 'ग्रेटर मैप' लगाया था, जिसमें कुछ भारतीय क्षेत्रों को दिखाया गया था। भारत के लिए बालेन शाह एक 'अनसुलझी पहेली' की तरह हैं। एक तरफ उनका भारत में पढ़ा-लिखा होना एक सकारात्मक पहलू है, तो दूसरी तरफ उनका प्रखर राष्ट्रवाद दिल्ली की चिंताएं बढ़ा सकता है।

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