चीन हर संभव तरीके से ताइवान पर दबाव बना रहा है। हाल की उसकी उपलब्द्धि है कि वह ताइवान की विपक्षी पार्टी केएमटी की अध्यक्ष चेंग ली-वुन को बीजिंग बुलाने में कामयाब रहा।
हांगकांग। चीन हर संभव तरीके से ताइवान पर दबाव बना रहा है। हाल की उसकी उपलब्द्धि है कि वह ताइवान की विपक्षी पार्टी केएमटी की अध्यक्ष चेंग ली-वुन को बीजिंग बुलाने में कामयाब रहा। वह सात से 12 अप्रैल तक बीजिंग में रहीं। यह घटनाक्रम चीन के लिए काफी अच्छा रहा क्योंकि ताइवान से बातचीत का एक कूटनीतिक मार्ग तलाश लिया है।
चेंग ली-वुन की यात्रा से बढ़ी ताइवान और अमेरिका की चिंता
हालांकि चेंग का यह कदम ताइवान और अमेरिका दोनों के लिए समस्या खड़ी करने का संकेत है। 2016 के बाद से केएमटी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं बीच यह पहली बैठक थी। चेंग ने इस यात्रा को शांति मिशन बताया जिसका मकसद जल डमरूमध्य के दोनों तरफ यानी चीन और ताइवान के बीच संबंधों में स्थायित्व लाना है।
शी जिनपिंग से मुलाकात ने खड़े किए आत्मसमर्पण जैसे सवाल
चेंग 10 अप्रैल को कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन झी जिनपिंग से भी मिलीं। कुछ लोग इस मुलाकात को शांतिपूर्ण तरीके से आत्मसमर्पण के रूप में देखते हैं। 'ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल' में 13 सेकेंड तक हाथ मिलाने के दौरान जिन्पिंग तने हुए और गंभीर खड़े हैं जबकि चेंग सिर झुकाए हुई थी और लग रहा था कोई याची अपने सम्राट को खुश करने आया है।
चेंग का बदलता राजनीतिक किरदार
चीन केएमटी को सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के मुकबले ज्यादा विश्वसनीय मानता है। चीन उसकी आलोचना करता है क्योंकि वह लगातार स्वतंत्रता और अलग अस्तित्व की हिमायत करता है। चेंग अवसरवादी हैं। उन्होंने पहले ताइवान की आजादी की वकालत की थी लेकिन अब वह निर्लज्जता पूर्ण ढंग से बीजिंग के साथ सीधे संवाद कर रही हैं। 1988 में उन्होंने केएमटी की आलोचना की थी और उसे घृणास्पद सत्ताधारी करार दिया था।
कूटनीति और सैन्य दबाव के बीच चीन की दोहरी नीति
2005 में चीन की विपक्ष के जरिए ताइवान को साधने की कोशिश नाटकीय ढंग से पलटने के बाद केएमटी से जुड़ाव से पूर्व वह डीपीपी की उदीयमान नेता थीं। अगर केएमटी 2.3 करोड़ ताइवानियों का भाग्य वार्ता के टेबल या शी जिन्पिंग के हाथों में सौंप रही है जो बहुत ही घातक है। अप्रैल 2026 में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस कूटनीतिक चाल का उद्देश्य ताइवान के वर्तमान सत्ताधारी दल (DPP) को दरकिनार कर, विपक्षी नेता के माध्यम से शांति और एकीकरण का संदेश देना है, जबकि चीन द्वीप पर सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है।
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