फिलिस्तीन राज्य के दूतावास ने 'कैदी दिवस' की पूर्व संध्या पर एक प्रेस वक्तव्य जारी कर फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया है।
नई दिल्ली। फिलिस्तीन राज्य के दूतावास ने 'कैदी दिवस' की पूर्व संध्या पर एक प्रेस वक्तव्य जारी कर फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर तत्काल ध्यान आकर्षित किया है। वक्तव्य में इसे एक लंबे समय से चली आ रही समस्या बताया गया है। कहा गया है कि मानवाधिकार संगठनों ने इसकी व्यापक रूप से आलोचना की है।
गिरफ्तारियों को आवाज दबाने का कठोर जरिया बताया
दूतावास ने अपने बयान में कहा कि फ़िलिस्तीनियों की बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारी और कारावास, स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय की मांग करने वाली आवाज़ों को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे कठोर उपायों में से एक है। वक्तव्य में कहा गया कि 1967 से अब तक लगभग साढ़े सात लाख फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार कर हिरासत में लिया जा चुका है।
अक्टूबर 2023 के बाद बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का दावा
वक्तव्य में 7 अक्टूबर, 2023 के बाद के घटनाक्रमों पर प्रकाश डालते हुए दावा किया गया कि येरुशलम सहित कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लगभग 22,000 फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 1,760 बच्चे, 731 से अधिक महिलाएं और 240 पत्रकार शामिल हैं। इसमें यह भी बताया गया कि 19,954 से अधिक प्रशासनिक हिरासत आदेश जारी किए गए हैं, जो इस अवधि में हुई कुल गिरफ्तारियों का लगभग 91 प्रतिशत है।
हिरासत में मौतों और लापता शवों पर गहरी चिंता
दीर्घकालीन हिरासत संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए दूतावास ने कहा कि 1967 से अब तक हिरासत में 326 कैदियों की मौत हो चुकी है। इनमें से 97 शव अब भी बरामद नहीं हुए हैं। दूतावास ने यह भी दावा किया कि इनमें से 86 मौतें अक्टूबर 2023 के बाद हुई हैं, जबकि गाजा के कई बंदी अब भी जबरन लापता किए जाने के शिकार हैं।
जेलों में खराब हालात और बिना मुकदमे हिरासत पर सवाल
बयान के अनुसार, लगभग 9,600 फ़िलिस्तीनी इस समय इज़रायली जेलों में बंद हैं। इनमें लगभग 350 बच्चे और 84 महिलाएं शामिल हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि 3,532 बंदियों को बिना किसी आरोप या मुकदमे के प्रशासनिक हिरासत में रखा गया है। दूतावास ने यह भी आरोप लगाया कि बंदियों को कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इनमें चिकित्सा उपेक्षा, बुनियादी अधिकारों पर प्रतिबंध, शारीरिक शोषण और कुछ मामलों में यौन हिंसा शामिल है। इसमें आगे कहा गया है कि गाजा में चल रहे संघर्ष के शुरू होने के बाद से हिरासत में 100 से अधिक बंदियों की मौत हो चुकी है।
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