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इंडोनेशिया भूस्खलन: 42 लापता, 19 मरीन

इंडोनेशिया में भूस्खलन: 42 लोग लापता, 19 मरीन सैनिक भी शामिल

बांडुंग (इंडोनेशिया), 26 जनवरी। इंडोनेशिया के पश्चिम जावा प्रांत में हुए भीषण भूस्खलन में लापता हुए 42 लोगों में मरीन फोर्स के 19 सदस्य भी शामिल हैं।

इंडोनेशिया में भूस्खलन 42 लोग लापता 19 मरीन सैनिक भी शामिल

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इंडोनेशिया में भूस्खलन, 42 लोग लापता

इंडोनेशिया के पश्चिम जावा प्रांत में हुए भीषण भूस्खलन में लापता हुए 42 लोगों में मरीन फोर्स के 19 सदस्य भी शामिल हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान हादसा

अधिकारियों के अनुसार, मरीन सैनिक दुर्गम इलाकों में भारी बारिश के बीच प्रशिक्षण ले रहे थे। इसी दौरान शनिवार तड़के पश्चिम जावा प्रांत के पासिर लांगू गांव के पास माउंट बुरंगरांग की ढलानों पर भूस्खलन हो गया। इस हादसे में सैनिकों का शिविर और आसपास स्थित लगभग 34 मकान मलबे में दब गए।

बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान

भूस्खलन के बाद व्यापक खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया है। राहत कार्य में लगे कर्मियों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2,100 कर दी गई है। बचावकर्मी वाटर पंप, ड्रोन और खुदाई मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम कर रहे हैं।

17 मौतों की पुष्टि

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार अब तक 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नौसेना प्रमुख ने बताया कि मृतकों में चार मरीन सैनिक शामिल हैं।

कई मरीन सैनिक अब भी लापता

नौसेना के अनुसार, ये सैनिक 23 सदस्यीय एक टीम का हिस्सा थे, जो इंडोनेशिया–पापुआ न्यू गिनी सीमा से जुड़े प्रशिक्षण में शामिल थी। बाकी मरीन सैनिकों समेत कई लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।

भारी बारिश बनी हादसे की वजह

अधिकारियों ने बताया कि लगातार दो रात हुई भारी बारिश के कारण ढलान की मिट्टी अत्यधिक गीली हो गई थी। इसी वजह से पूरा प्रशिक्षण क्षेत्र मलबे में दब गया। संकरी सड़कों के कारण भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं।

मलबा हटाने में खतरा

राष्ट्रीय खोज और बचाव एजेंसी के अनुसार, भूस्खलन का मलबा करीब दो किलोमीटर तक फैला हुआ है और कुछ जगहों पर इसकी मोटाई 8 मीटर तक है। अस्थिर मिट्टी और सीमित दृश्यता के कारण रात में बचाव कार्य रोकना पड़ा।

इंडोनेशिया में भूस्खलन आम

इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों वाला देश है। यहां अक्टूबर से अप्रैल के बीच मौसमी बारिश और ऊंची ज्वार-लहरों के चलते अक्सर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं। देश की बड़ी आबादी पहाड़ी इलाकों और बाढ़ संभावित मैदानी क्षेत्रों के आसपास रहती है।

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