संयुक्त राज्य अमेरिका में सरकारी कामकाज के बड़े हिस्से की बंदी (Government Shutdown) छठे दिन भी जारी है, जो 1 अक्टूबर को संघीय वित्तीय वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ शुरू हुई थी।
वाशिंगटन, 6 अक्टूबर। अमेरिका में सरकारी कामकाज के बड़े हिस्से की बंदी का खतरा छठें दिन भी जारी रहा। गत 1 अक्टूबर को यह संकट आरंभ होने के बाद पिछले सप्ताह ट्रंप की कांग्रेस नेताओं से मुलाक़ात में कोई नतीजा नहीं निकला था। दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत के भी कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आंशिक सरकारी बंदी को समाप्त करने के लिए कांग्रेसी डेमोक्रेट्स के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता है, तो ट्रंप प्रशासन संघीय कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू कर देगा।
इस काम बंदी के पाँचवें दिन व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने सीएनएन के "स्टेट ऑफ़ द यूनियन" कार्यक्रम में कहा था कि उन्हें अभी भी डेमोक्रेट्स के पीछे हटने का एक मौका दिख रहा है जिससे इस भारी नुकसानदेह बंदी और संघीय कर्मचारियों की छंटनी को टाला जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि व्हाइट हाउस के बजट निदेशक रसेल वॉट ने धमकी दी थी कि इन स्थितियों के जारी रहने पर लगभग आठ लाख संघीय कर्मचारियों की छँटनी करनी होगी। हैसेट का कहना था कि "राष्ट्रपति ट्रंप और रसेल वॉट चीजों को व्यवस्थित करने और ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई करने की तैयारी में लगे हैं, लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा,"
बाद में रविवार को, पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि प्रशासन संघीय कर्मचारियों की छंटनी कब शुरू करेगा, तो ट्रंप ने जवाब दिया: "ऐसा अभी भी हो रहा है।"
संघीय वित्तीय वर्ष 2026 की शुरुआत वाले दिन 1 अक्टूबर को यह बंदी तब शुरू हुई जब सीनेट में डेमोक्रेट्स ने एक अल्पकालिक वित्त पोषण प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उस प्रस्ताव के स्वीकृत होने पर संघीय एजेंसियों को 21 नवंबर तक सक्रिय रखा जा सकता था।
सीनेट सदस्य डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने सीबीएस के "फेस द नेशन" कार्यक्रम में कहा, "उन्होंने हमसे बात करने से इनकार कर दिया है।" शूमर ने कहा कि गतिरोध का समाधान केवल ट्रम्प और चार कांग्रेस नेताओं के बीच आगे की बातचीत से ही हो सकता है।
डेमोक्रेट्स अफोर्डेबल केयर ऐक्ट के माध्यम से अमेरिकियों को निजी स्वास्थ्य बीमा खरीदने में मदद के लिए बढ़े हुए प्रीमियम टैक्स क्रेडिट के स्थायी विस्तार की मांग कर रहे हैं। वे यह आश्वासन भी चाहते हैं कि व्हाइट हाउस किसी भी समझौते में तय किए गए खर्च को एकतरफा तरीके से रद्द करने की कोशिश न करे।
उल्लेखनीय है कि ट्रम्प ने स्वास्थ्य सेवा संबंधी चिंताओं पर रुचि दिखाते हुए ओबामाकेयर के नाम से जाने जाने वाले अफोर्डेबल केयर ऐक्ट में सुधार करने की रिपब्लिकन की मंशा पर ज़ोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा है कि "हम इसे ठीक करना चाहते हैं ताकि यह कारगर हो। ओबामाकेयर लोगों के लिए एक आपदा रहा है, इसलिए हम इसे ठीक करना चाहते हैं ताकि यह कारगर हो।"
सीनेट में आज फिर मतदान
सीनेट के डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सदस्यों ने स्वास्थ्य सेवा और अन्य मुद्दों पर आम सहमति बनाने के उद्देश्य से अनौपचारिक बातचीत की है ताकि सरकारी तंत्र को फिर से सक्रिय करने के लिए किसी समझौते पर पहुँचा जा सके।
सोमवार को, सीनेट को अस्थायी वित्त पोषण विधेयक पर पाँचवीं बार मतदान करना है, जो रिपब्लिकन-नियंत्रित प्रतिनिधि सभा में पहले ही पारित हो चुका है। किसी भी विधेयक को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक 60 वोट मिलने की उम्मीद नहीं है। 53-47 सीटों के बहुमत और सदन के वित्त पोषण विधेयक के विरोध में एक रिपब्लिकन के साथ, रिपब्लिकन नेताओं को इस विधेयक का समर्थन करने के लिए कम से कम आठ डेमोक्रेट्स की आवश्यकता है, लेकिन अब तक केवल तीन ही इस प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं।
सात वर्षों में पहली बार
संयुक्त राज्य अमेरिका में संघीय सरकार की कामबंदी लगभग सात वर्षों में पहली बार हुई है। खर्च और स्वास्थ्य सेवा पर गहरे मतभेदों से उत्पन्न इस गतिरोध के कारण लाखों संघीय कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। 1977 के वित्तीय वर्ष से, अमेरिकी सरकार को 20 बार वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा है, जो अक्सर केवल एक दिन तक रहा है। यह ऐसा 21वाँ मामला है। 2013 में हुए पिछले पूर्ण बंद के दौरान लगभग 8,50,000 संघीय कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेज दिया गया था।
भारत पर प्रभाव
अमेरिकी सरकार के कामकाज की बंदी और तटकर के झटकों का संगम भारत के लिए एक जटिल चुनौती है। इनके कारण अब भारत को कुशल मौद्रिक, राजकोषीय और कूटनीतिक प्रबंधन की आवश्यकता ताकि निर्यातों को बचाने, बाजारों को स्थिर रखा जा सके और निवेशकों का विश्वास न टूटने पाए। हालांकि भारतीय शेयर बाजार ने लचीलापन दिखाया है, लेकिन लंबे समय तक बंद रहने और इसके संभावित आर्थिक नतीजों के कारण सतर्क आशावाद की आवश्यकता है। इस व्यवधान से वैश्विक आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है, और भारत में निवेशकों की भावना पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। इनसे मुद्रा पर और भी दबाव पड़ सकता है।