नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड्स दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 17 बड़े समझौतों और साझेदारियों पर हस्ताक्षर हुए...
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड्स दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 17 बड़े समझौतों और साझेदारियों पर हस्ताक्षर हुए। ये समझौते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक, शिक्षा, ऊर्जा, खेती, सेहत, डेयरी, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्रों से भी जुड़े हैं। इसके से बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि ये फैसले आने वाले समय में विकास, रोजगार, निवेश और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देंगे।
भारत और नीदरलैंड्स ने 2026-2030 रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप भी तैयार किया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इससे भारत को नई तकनीक, रोजगार और वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। रक्षा, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
समझौते में 2026-2030 के लिए नई रणनीतिक साझेदारी, टाटा और एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण, आसान वीजा नियम और चोल काल के शाही तांबे के पत्रों की वापसी प्रमुख हैं। इन फैसलों से तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में भारी निवेश आएगा, जिससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार और तरक्की के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत-नीदरलैंड्स रणनीतिक साझेदारी का महत्व
भारत और नीदरलैंड ने 2026-2030 रणनीतिक साझेदारी रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इससे भारत को नई तकनीक, रोजगार और वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी। रक्षा, साइबर सुरक्षा और सप्लाई चेन पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
समझौतों के खास विंदु और उनका प्रभाव
नीदरलैंड्स ने चोल काल की ऐतिहासिक तांबे की पट्टिकाएं भारत लौटाने पर सहमति दी। इससे भारतीय इतिहास और संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। रिसर्च और संग्रहालयों को भी फायदा होगा। भारत और नीदरलैंड्स के बीच वीजा प्रक्रिया आसान बनाने पर सहमति बनी। इससे भारतीय छात्रों, प्रोफेशनल्स और कामगारों को पढ़ाई और नौकरी के बेहतर अवसर मिलेंगे। इंटर्नशिप और लंबी अवधि के वीजा में भी सहूलियत मिलेगी।
दोनों देशों के विश्वविद्यालय अब संयुक्त रिसर्च और डिग्री कार्यक्रम चला सकेंगे। भारतीय छात्रों और शिक्षकों को डच यूनिवर्सिटी में पढ़ाई और रिसर्च के नए मौके मिलेंगे। इससे रिसर्च, एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय छात्रों को वैश्विक एक्सपोजर मिलेगा। लाइडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सहयोग। यह समझौता भारतीय इतिहास और खासकर चोल काल पर रिसर्च को मजबूत करेगा। भारतीय विरासत को दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल की साझेदारी से गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को गति मिलेगी। इससे भारत चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई मजबूत होगी। इससे भारत की औद्योगिक ताकत बढ़ेगी।
भारत और नीदरलैंड्स ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात में मिलकर काम करेंगे। इससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार बढ़ेंगे। भारत यूरोप के ग्रीन एनर्जी बाजार में मजबूत जगह बना सकेगा। दोनों देश सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं में तकनीक और विशेषज्ञता साझा करेंगे। इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी।
ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा और नई तकनीक पर संयुक्त परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इससे निवेश और उद्योगों को फायदा मिलेगा। गुजरात की बड़ी जल परियोजना में नीदरलैंड्स तकनीकी मदद देगा। इससे पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। फूलों की खेती को आधुनिक तकनीक मिलेगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
डेयरी किसानों और पशुपालन क्षेत्र को नई तकनीक और प्रशिक्षण मिलेगा। इससे दूध उत्पादन और गुणवत्ता सुधरेगी। भारतीय पशुपालन क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, बीमारी नियंत्रण और स्किल ट्रेनिंग का लाभ मिलेगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य, मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया। भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में यह सहयोग मदद करेगा। व्यापार और आयात-निर्यात प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए यह समझौता हुआ।
इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी। दोनों देशों ने निवेश, हरित विकास, खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी बढ़ाने पर सहमति दी।
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