पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक स्तर पर मंहगाई के साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार पर भी खतरा मंडराने लगा है।
वॉशिंगटन (अमेरिका)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक स्तर पर मंहगाई के साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार पर भी खतरा मंडराने लगा है। विश्व बैंक ने विकासशील देशों में रोजगार के खतरों को लेकर चेतावनी जारी की है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितताओं के बीच विश्व बैंक ने दुनिया में एक बड़े रोजगार संकट की चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इससे विकास दर धीमी होने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर कम होने की आशंका है। भारत सहित विकासशील देशों में करीब 80 करोड़ नौकरियां कम होने का जोखिम बढ़ रहा है।
1.2 अरब युवाओं के लिए केवल 40 करोड़ नौकरियां
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि अगले 10-15 वर्षों में विकासशील देशों में लगभग 1.2 अरब युवा शक्ति नौकरी की दौड़ में शामिल होगी। लेकिन मौजूदा आर्थिक रफ्तार से इस दौरान केवल 40 करोड़ नौकरियां ही पैदा हो पाएंगी। इससे 80 करोड़ लोगों के समक्ष रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो सकता है। ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। पर्याप्त रोजगार न मिलने से सामाजिक अशांति (Social Unrest) और अवैध प्रवासन (Migration) बढ़ सकता है।
बेरोजगारी से बढ़ सकता है सामाजिक असंतोष और अवैध प्रवासन
बंगा ने रॉयटर्स को बताया कि मौजूदा रुझानों के अनुसार, ये अर्थव्यवस्थाएं केवल लगभग 400 मिलियन नौकरियां ही पैदा करेंगी, जिससे 800 मिलियन नौकरियों की कमी रह जाएगी। बंगा ने कहा, युद्ध लंबा चला तो बेरोजगारी बढ़ने का खतरा भी बढ़ता जाएगा। यह संकट विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए एक गंभीर संरचनात्मक चुनौती (Structural Challenge) है। बंगा ने विकास के लिए रोजगार सृजन को मुख्य रणनीति बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारों और नीति-निर्माताओं को एक साथ कई चुनौतियों से निपटना होगा। युद्ध संकट और दीर्घकालिक विकास दोनों पर फोकस जरूरी है।
बुनियादी विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान देने की जरूरत
"मास्टरकार्ड" के पूर्व सीईओ ने स्वीकार किया कि लोगों का ध्यान दीर्घकालिक लक्ष्यों पर केंद्रित करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि कोविड-19 महामारी के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई अल्पकालिक झटकों का सामना करना पड़ा है, जिनमें सबसे हालिया मध्य पूर्व का युद्ध भी है। उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं कि वित्त अधिकारी रोजगार सृजन, लोगों को बिजली ग्रिड से जोड़ना और स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना जैसी दीर्घकालिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित रखें। बंगा ने शुक्रवार को रिकॉर्ड किए गए एक साक्षात्कार में कहा, “हमें एक साथ कई काम करने होंगे। हम अभी अल्पकालिक चक्र से गुजर रहे हैं। दीर्घकालिक चुनौती रोजगार या जल की समस्या है।”
रोजगार बढ़ाने के लिए नीतिगत सुधार जरूरी
विश्व बैंक ने रोजगार बढ़ाने के लिए विकासशील देशों में नीतिगत सुधारों पर जोर दिया। इसमें कारोबार शुरू करने में आसानी, श्रम कानूनों में सुधार, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और बेहतर व्यापार व्यवस्था जैसे कदम शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक दुनिया भर में 11.7 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। यदि रोजगार के पर्याप्त मौके नहीं मिले तो अवैध प्रवासन जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। बुनियादी ढांचा, कृषि, पर्यटन और विनिर्माण में निवेश बढ़ाकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
तेल महंगा होने से भारत समेत कई देशों पर दबाव
अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में हर $10 की बढ़ोतरी से महंगाई में 60 बेसिस पॉइंट्स तक की वृद्धि हो सकती है। भारत, जो अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है, में रुपये पर भी दबाव बढ़ेगा। इससे देश में उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ सकता है। उद्योगों में लागत में वृद्धि के कारण छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) पर असर पड़ना तय है। इससे उद्योगों में छंटनी हो सकती है।
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