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गरीबी की दर 11 वर्षों में सबसे ऊपर

पाकिस्तान में गरीबी और असमानता ने रिकार्ड तोड़ा

पाकिस्तान की गरीबी दर तेज इजाफा के साथ 29 प्रतिशत हो गई है।  यह दर 11 वर्षों में सबसे ऊंची है। इसी तरह आय में असमानता तीन दशक में सबसे खराब स्थिति में पहुंच गई है।

पाकिस्तान में गरीबी  और असमानता ने रिकार्ड तोड़ा

पाकिस्तान में गरीबी असमानता ने रिकार्ड तोड़ा

गरीबी में 11 वर्षों में सबसे ऊंची

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की गरीबी दर तेज इजाफा के साथ 29 प्रतिशत हो गई है।  यह दर 11 वर्षों में सबसे ऊंची है। इसी तरह आय में असमानता तीन दशक में सबसे खराब स्थिति में पहुंच गई है। ये आकड़े साबित करते हैं कि आर्थिक प्रबंधन में बड़ी खामी है। 
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी सर्वे में यह यह तथ्य उजागर हुआ है कि करीब सात करोड़ पाकिस्तानी मासिक गरीबी रेखा 8,484 रुपये से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। 
 वित्तवर्ष 2024-25 के प्रारंभिक तौर पर ज्ञात तथ्यों के अनुसार गरीबी पिछले सर्वे 2018-19 की तुलना में गरीबी में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2019 में गरीबी का अनुपात 21.9 प्रतिशत था लेकिन अब बढ़कर 28.9 पर पहुंच गया है। यह 1914 से सबसे ऊंचा है। 
इसी तरह आर्थिक असमाता 32.7 पर पह़ुंच गई है। यह 1999 से सबसे ज्यादा है। इसमें ग्रामीण समुदय को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। एक अन्य खबर के अनुसार, देश के सभी प्रांतों में गरीबी में बढ़ोतरी हुई है।
एक बड़े अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान में गरीबी बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें पिछले छह साल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के तीन राहत कार्यक्रम, कोरोना महामारी का असर और महंगाई शामिल है। इसके अलावा, जीडीपी की धीमी विकास दर, दो बड़ी बाढ़ और गेहूं के समर्थन मूल्य को खत्म करने जैसे फैसलों ने भी हालात को और खराब कर दिया है।

पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गरीबी ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान की तुलना में पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में गरीबी ज्यादा तेजी से बढ़ी है। हालांकि, प्रांतों के हिसाब से अलग-अलग आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। इस बढ़ोतरी ने पिछले साल में गरीबी कम करने की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। 2005-06 में गरीबी दर 50.4 प्रतिशत थी, जो 2018-19 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई थी।
गरीबी आकलन समिति के अध्यक्ष डा. आरिफ का कहना है कि उन्होंने सरकार को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंप दी हैं। हालांकि, उन्होंने गरीबी की सटीक दर पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इससे पहले योजना मंत्री अहसान इकबाल ने 17 सदस्यों वाली एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।

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