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असली मकसद प्रोपेगेंडा फैलाना और दमन को छिपाना

पाक का 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे' पाखंड, मानवाधिकार उल्लंघन छिपाने का आरोप

पाकिस्तान हर वर्ष पांच फरवरी को 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे' मनाता है। आधिकारिक तौर पर कहा जाता है कि इसका उद्देश्य कश्मीरियों के अधिकारों के प्रति एकजुटता दिखाना है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

पाक का कश्मीर सॉलिडैरिटी डे पाखंड मानवाधिकार उल्लंघन छिपाने का आरोप

Pakistan’s Kashmir Solidarity Day Called Hypocrisy by Rights Activists |

लंदन/वाशिंगटन। पाकिस्तान हर वर्ष पांच फरवरी को 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे'  मनाता है। आधिकारिक तौर पर कहा जाता है कि इसका उद्देश्य कश्मीरियों के अधिकारों के प्रति एकजुटता दिखाना है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। इसका असली मकसद सरकारी तौर पर प्रोपेगेंडा फैलना और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर और उसके नियंत्रण वाले पूरे क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति से दुनिया का ध्यान हटाना होता है।

गिलगिट बाल्टिस्तान स्टडी इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन के अध्यक्ष ने की निंदा

गिलगिट बाल्टिस्तान स्टडी इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन के अध्यक्ष सेंगे सेरिंग ने पाकिस्तान द्वारा पांच फरवरी को 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे' मनाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे कश्मीर पाखंड दिवस करार देते हुए आरोप लगाया कि पाक अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में मानवाधिकारों की अनदेखी करता है। इन क्षेत्रों में पाक अधिकृत गिलगिट- बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू- कश्मीर शामिल है। वीडियो के माध्यम से जारी वक्तव्य में सेरिंग ने कहा है कि पाकिस्तान का कश्मीरियों के प्रति एकजुटता दिखावा है क्योंकि पाक अधिकृत क्षेत्रों में दमन और विस्थापन जारी है तथा सांविधानिक अधिकारों को नकारा जाता है।

गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग मनाएंगे कश्मीर पाखंड दिवस

सेरिंग ने कहा कि आज हम गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग कश्मीर पाखंड दिवस मनाएंगे। इस समय पाकिस्तान अधिकृत बलूचिस्तान में नरसंहार-जनसंहार चल रहा है। पूरे पाक नियंत्रित क्षेत्र की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए सेरिंग ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान, पश्तून क्षेत्र, पाक अधिकृत जम्मू और कश्मीर और पाक अधिकृत गिलगिट-बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

असली मकसद प्रोपेगेंडा फैलाना और दमन को छिपाना

उधर, पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर के कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने पाकिस्तान द्वारा पांच फरवरी को 'कश्मीर सॉलिडैरिटी डे' मनाने की तीखी आलोचना की और कहा कि यह 'फर्जीवाड़े की कवायद' है। इसका मकसद मानवाधिकारों का उल्लंघन, खराब गवर्नेंस और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाक अधिकृत गिलगिट-बाल्टिस्तान के संसाधनों के दोहन को छिपाना है।

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