West bengal : कोलकाता। बांग्लादेश की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के जिलों के विभिन्न स्थानों पर बांग्लादेश में जाने वाले बांग्लादेशियों की तादाद बढ़ने की वजह से सीमा सुरक्षाबल और राज्य पुलिस की परेशानी..
West bengal : कोलकाता। बांग्लादेश की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के जिलों के विभिन्न स्थानों पर बांग्लादेश में जाने वाले बांग्लादेशियों की तादाद बढ़ने की वजह से सीमा सुरक्षाबल और राज्य पुलिस की परेशानी बढ़ गई हैं। बांग्लादेश से अवैध तरीके आकर पश्चिम बंगाल में लंबे समय रह रहे बांग्लादेशी चुनाव आयोग के एसआइआर के दौरान पकड़े और जेल जाने के भय से बांग्लादेश वापस लौट रहे हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदा जिले के उन विभिन्न स्थानों में बांग्लादसी जमा हो रहे हैं जहां से बांग्लादेश जाया जा सकता है। उनकी संख्या दस-बीस से बढ़ कर सौ-डेढ़ सौ हो गई हैं। उत्तर चौबीस परगना के तहत बनगांव में पेट्रोपोल सीमा पर बांग्लादेश जाने वाले बांग्लादेशियों की सबसे अधिक संख्या में इकट्ठा हैं। भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारी और बांग्लादेश की सीमा पर तैनात सुरक्षा बल के अधिकारी बांग्लादेशियों की जांच-पड़ताल कर बांग्लादेश भेज रहे हैं।
जानकारों के अनुसार कोलकाता के न्यूटाउन, साल्टलेक समेत विभिन्न जगहों की गरीब-मजदूर वस्तियों के अनेक झुग्गी-झोपडियों में अचानक ताला लगा मिल रह है। बाद में पता चल पाता है कि उनमें रहने वाले लोग बांग्लादेशी थे और ताला लगा कर चुपचाप चले गए। हावड़ा और उत्तर चौबीस परगना के बनगांव, बारासात समेत कई इलाकों में गरीब-मजदूर बस्तियों के ताला लगे घर मिल रहे हैं।
बांग्लादेश जाने के लिए सीमा पर जुटे बांग्लादेशियों की बातचीत से खुलासा हो रहा है कि कोई अकेले, तो कई कई लोगों के साथ, कोई अपने परिवार के साथ अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल में आए हैं। कोई दो-चार साल से तो कोई बीस-बीस, पच्चीस-पच्चीस साल से बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आकर रह रहे हैं। वे मजदूरी और कोई न कोई व्यवसाय कर जीवन यापन कर रहे थे। उनमें से ऐसे भी बांग्लादेशी हैं जिनके पास आधार कार्ड हैं। ऐसी भी बांग्लादेशी हैं जो यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने एक-दो बार चुनाव में वोट दिया है, लेकिन 2002 के वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं हैं।
बांग्लादेश वापस जाने का कारण के बारे मे उनका कहना है कि एसआइआर की वजह से उन्हें पकड़े और जेल जाने का डर है। इससे बचने के लिए वे बांग्लादेश जा रहे हैं। बांग्लादेश जाने के लिए सीमा पर जुटे बांग्लादेशी यह स्वीकार करते हैं कि वे दलालों को एक-दो हजार से लेकर पांच-पांच हजार रुपए देकर और उनकी मदद से पश्चिम बंगाल में आए हैं। उन्होंने कोलकाता और दूसरे इलाकों में रहने की व्यवस्था के लिए भी दलालों की मदद ली। पहले से पश्चिम बंगाल में रहे बांग्लादेशियों से भी उन्हें मदद मिली।
जानकार बत्ताते हैं कि एसआइआर की वजह से बांग्लादेश की सीमा पर बीएसएफ और राज्य पुलिस की चौकसी बढ़ गई है। सीमा पार कर बांग्लादेश से आने बाग्लादेशी उत्तर चौबीस परगना और नदिया जिलों के सीमा से सटे इलाकों में पकड़े जा रहे हैं।
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