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ईरान युद्ध में साथ न देने पर जताई नाराजगी

ट्रंप ने की NATO की कड़ी आलोचना, अमेरिका की प्रतिबद्धता पर उठाए सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नाटो देशों की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि ईरान युद्ध के दौरान उन्होंने समुचित जवाब नहीं दिया।

ट्रंप ने की nato की कड़ी आलोचना अमेरिका की प्रतिबद्धता पर उठाए सवाल

Trump Criticizes NATO, Questions US Commitment Amid Iran Conflict |

फ्लोरिडा (अमेरिका)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नाटो देशों की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि ईरान युद्ध के दौरान उन्होंने समुचित जवाब नहीं दिया। यह उनकी 'बड़ी गलती है।' उन्होंने नाटो गठबंधन के प्रति अमेरिका की भविष्य की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाए।

नाटो का युद्ध में शामिल न होना भविष्य के लिए बड़े संकेत

फ्लोरिडा में 'भावी निवेश की पहल की प्राथमिकता संबंधी सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा-' जब अमेरिका दुनिया की भलाई के लिए ईरान से लोहा ले रहा था, तब नाटो देशों ने मामूली सैन्य मदद तक नहीं भेजी। ट्रंप ने दो-टूक कहा कि युद्ध हमेशा जोखिम भरा होता है, लेकिन उन्हें अपनी सेना पर पूरा भरोसा था क्योंकि वह दुनिया में सबसे ताकतवर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो का वहां मौजूद न होना भविष्य के लिए बड़े संकेत देता है।'

नाटो देशों पर अमेरिका का साथ नहीं देने का आरोप

ट्रंप ने अमेरिका पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए कहा कि वाशिंगटन हर साल नाटो देशों की सुरक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिका को जरूरत थी, तब ये देश साथ नहीं थे तो अब अमेरिका को उनके लिए खड़ा रहने की क्या जरूरत है? ट्रंप के मुताबिक, 'वे हमारे लिए वहां नहीं थे, तो हम उनके लिए क्यों रहें?'

ब्रिटिश जहाजों को 'खिलौना' बताया

इससे पहले गुरुवार को एक कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप ने नाटो की आलोचना करते हुए इसे एक टेस्ट बताया था, जिसमें गठबंधन फेल रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अकेले युद्ध का पूरा बोझ उठा रहा है। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन पर भी तंज कसा और कहा कि वे नहीं चाहते कि अमेरिका किसी ब्रिटिश युद्ध में घसीटा जाए। उन्होंने ब्रिटेन के विमानवाहक पोतों की तुलना अमेरिका के सामने खिलौनों से कर दी। 

नाटो ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए भी कोई मदद नहीं की

इन्वेस्टमेंट फोरम के दौरान ट्रंप ने इस बात पर गुस्सा जाहिर किया कि नाटो देशों ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को सुरक्षित करने में कोई मदद नहीं की। यह समुद्री रास्ता ग्लोबल तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है। एएनआई के अनुसार, ट्रंप ने मजाक में इसे 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' भी कह दिया और बाद में कहा कि उनके मुंह से निकला हर शब्द सोच-समझकर होता है।

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