अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गये के कारण देश के निर्यातकों कों गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। केन्द्र सरकार ने निर्यातकों को इस संकट से उबारने के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है.
केन्द्र ने निर्यातकों के लिए किया 4531 करोड़ के पैकेज का एलान
अमेरिकी टैरिफ संकट से निर्यातकों उबारने की दिशा में उठाया कदम
नई दिल्ली।
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाये गये के कारण देश के निर्यातकों कों गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। केन्द्र सरकार ने निर्यातकों को इस संकट से उबारने के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसमें क्रेडिट सहायता, निर्यात प्रोत्साहन मिशन और नए बाजारों की खोज जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि लॉजिस्टिक्स, कार्यशील पूंजी और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सके और रोजगार सुरक्षित रहे।
अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ (शुल्क) के कारण भारतीय निर्यातकों को वस्त्र, चमड़ा, रत्न, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और देश के निर्यात में गिरावट आई है। इस टैरिफ संकट के बीच केंद्र सरकार ने निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए 4531 करोड़ रुपये की समर्थन योजना की शुरुआत की है। यह योजना सरकार के 25060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का हिस्सा है। वर्ष 2025 से 2031 के बीच योजना पर 4531 करोड़ खर्च होंगे। वहीं, चालू वित्त वर्ष में 500 करोड़ अलग से तय किए गए हैं।
विदेश व्यापार विभाग द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक, मार्केट एक्सेस सपोर्ट योजना के तहत 2025 से 2031 के बीच छह वर्षों में ₹4,531 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें से ₹500 करोड़ की राशि FY 2025-26 के लिए निर्धारित की गई है। इस फंड का इस्तेमाल निर्यातकों की वैश्विक बाजारों में मौजूदगी बढ़ाने और नए निर्यात अवसर तलाशने के लिए किया जाएगा।
विदेश व्यापार महानिदेशक अजय भादू ने कहा, योजना के तहत खरीदारों-विक्रेताओं की बैठक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों एवं विदेशी खरीदारों के भारत आकर निर्यातकों से सीधे बात करने वाले आयोजनों के लिए संगठित वित्तीय और संस्थागत सहयोग दिया जाएगा।
पांच साल का अग्रिम कैलेंडर तैयार होगा
उन्होंने बताया कि योजना के तहत तीन से पांच साल का अग्रिम कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रमुख मार्केट एक्सेस इवेंट्स को पहले से मंजूरी दी जाएगी। इससे निर्यातकों और आयोजन एजेंसियों को समय रहते योजना बनाने में मदद मिलेगी और बाजार विकास के प्रयासों में निरंतरता बनी रहेगी।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस योजना से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को विशेष लाभ मिले। इसके तहत समर्थित आयोजनों में कम से कम 35% भागीदारी MSMEs की अनिवार्य होगी। साथ ही, नए भौगोलिक क्षेत्रों और छोटे बाजारों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि निर्यात का विविधीकरण बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल का न्यूनतम आकार 50 प्रतिभागियों का तय किया गया है, हालांकि बाजार परिस्थितियों और रणनीतिक जरूरतों के अनुसार इसमें लचीलापन रखा गया है।
आंशिक हवाई किराया सहायता भी दी जाएगी
सरकार ने छोटे निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए एक और अहम प्रावधान किया है। जिन निर्यातकों का पिछले वर्ष का निर्यात टर्नओवर ₹75 लाख तक रहा है, उन्हें आंशिक हवाई किराया सहायता दी जाएगी, ताकि नए और छोटे निर्यातक भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें। कुल मिलाकर, यह योजना भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती देने, नए बाजार खोलने और मौजूदा व्यापार चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाने वाली मानी जा रही है।
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