वित्तीय जरूरतों को पूरा करने लायक बैंकिंग सिस्टम बनाने की योजना के तहत सुझाव देने के लिए केन्द्र सरकार एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करेगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी।
बैंकिंग सिस्टम में वित्तीय जरूरतों को पूरा करने को होगा बदलाव
सुधार के सुझाव लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन जल्द : वित्त मंत्री
नई दिल्ली।
विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने लायक बैंकिंग सिस्टम बनाने की योजना के तहत सुझाव देने के लिए केन्द्र सरकार एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करेगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार 'विकसित भारत' के लिए बैंकिंग क्षेत्र पर एक 'हाई-लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग' का गठन करेगी। इसका उद्देश्य एक ऐसा खाका तैयार करना है जो बड़े बैंकों को ब्लूप्रिंट बनाए, ताकि विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके। कमेटी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक, सुदृढ़ और वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने के लिए खाका (blueprint) तैयार करेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह समिति भविष्य की जरूरतों के अनुसार बड़े कर्जदाता (mega lenders) तैयार करने के सुझाव देगी। कमेटी का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को विकसित भारत (Viksit Bharat) के अनुरूप परियोजनाओं के वित्तपोषण और साख (credit) आवश्यकताओं के अनुरूप बैंकिंग सिस्टम बनाना, बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार करना, जमा (deposit) और ऋण (credit) वृद्धि सुनिश्चित करना शामिल है। साथ ही इस समिति का उद्देश्य बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन (उच्च लाभप्रदता और बेहतर संपत्ति गुणवत्ता) को और आगे बढ़ाना है ताकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र का लक्ष्य हासिल कर सके।
वित्त मंत्री ने बताया कि, 'हम चाहते हैं कि समिति हमें बताए कि हमें क्या करना चाहिए ताकि बैंकिंग क्षेत्र 'विकसित भारत' के लिए वित्तपोषण उपलब्ध करा सके।" इसके लिए पैसे, वित्तपोषण, क्रेडिट और आम आदमी तक पहुंचने के लिए बैंकिंग सुविधाओं की आवश्यकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय संबंधी सुझाव पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे इस तरह से संकीर्ण नहीं किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने एक फरवरी को बजट भाषण में 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति' के गठन का प्रस्ताव पेश किया था। बजट में सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में दक्षता सुधार के लिए पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी रखा था। पीएफसी और आरईसी दोनों केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं।
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