नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के बैंक उस बीमा पॉलिसी को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं...
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश के बैंक उस बीमा पॉलिसी को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं, जिसकी जरूरत नहीं है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को बीमा पालिसी बेचने के बजाय अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए यह बात कही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें (बैंकों को) अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, 'बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए जिसके लिए उनका गठन किया गया है। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जताई है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच फंसा रहा।'
मालूम हो कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी बैंकों द्वारा बीमा बेचने पर सहज नहीं है। आरबीआई ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री किये जाने पर 11 फरवरी को दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।
आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, 'मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह शब्द गलत बिक्री किसी को ठेस पहुंचाने के बजाय, शब्दकोश में एक और शब्द बनकर रह गया है।'
उन्होंने कहा कि कई मामलों में बैंक ग्राहकों को बीमा उत्पाद खरीदने के लिए कहते हैं जबकि उनके पास पहले से आवश्यक बीमा होता है। आरबीआई यह सोचकर ऐसे मामलों की निगरानी नहीं कर रहा था कि यह बीमा नियामक के दायरे में आता है। इरडा का मानना था कि बैंक उसके प्रत्यक्ष नियमन में नहीं आते। इस नियामकीय अंतर के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति गिरवी रखकर गृह ऋण लेता है, तो उससे अतिरिक्त बीमा लेने को क्यों कहा जाता है जबकि जोखिम पहले से 'कवर' होता है।
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