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ब्रह्मोस सिर्फ एक अचूक मिसाइल नहीं...

ब्रह्मोस सिर्फ एक अचूक मिसाइल नहीं, रूस - भारत संबध का आधार भी

भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाए गए सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का निर्माण अब लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील भटगांव में किया जा रहा है।

ब्रह्मोस सिर्फ एक अचूक मिसाइल नहीं रूस -  भारत संबध का आधार भी

ब्रह्मोस सिर्फ एक अचूक मिसाइल नहीं, रूस - भारत संबध का आधार भी |

नई दिल्ली।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के बीच रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक रवि कुमार गुप्ता ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल "ब्रह्मोस" को एक "अद्वितीय हथियार प्रणाली" बताते हुए इसे रूस - भारत द्विपक्षीय सहयोग का प्रमाण बताया है। भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाए गए सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल "ब्रह्मोस" का अब लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील भटगांव में किया जा रहा है। इस उत्पादन यूनिट का पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था।

डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक रवि गुप्ता ने "ब्रह्मोस" की तारीफ करते हुए कहा कि इस "अद्वितीय हथियार प्रणाली" महत्व सिर्फ हार्डवेयर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के प्रगाढ़ द्विपक्षीय सहयोग को भी दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और मज़बूत होगा"। राष्ट्रपति पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच आज दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक चल रही है। बैठक में कई रक्षा समझौतों की उम्मीद है। सिंगापुर से न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए गुप्ता ने कहा, "रूस और भारत द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली कई मायनों में दुनिया में एक अद्वितीय हथियार प्रणाली रही है।"

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सबसे प्रभावशाली रहा था ब्रह्मोस

रवि गुप्ता ने कहा कि "दुनिया ने कई मौकों पर ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की ताकत देखी है। लेकिन हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह सबसे प्रभावशाली रहा, जब ब्रह्मोस दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसकर हमला करने और वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम था, जो शायद दुनिया में कोई अन्य हथियार प्रणाली नहीं कर पाई होगी। यह ध्वनि की गति से तीन गुना अधिक गति से उड़ने वाली एक सुपरसोनिक मिसाइल है; इस गति से, इसकी काइनेटिक ऊर्जा विनाशकारी होती है। आज यही मिसाइल पर लगाए गए विशेष वॉरहेड की विनाशकारी शक्ति है।"

गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि इसके प्रदर्शन को देखते हुए, यह बहुत स्वाभाविक है कि दोनों देश इस अद्वितीय संबंध को जारी रखें और इस मिसाइल प्रणाली के और भी उन्नत संस्करण विकसित करने के लिए काम करते रहें। उन्होंने आगे कहा "जब हम अधिक उन्नत संस्करणों की तलाश करेंगे, तो हम विभिन्न प्रकार के वॉरहेड की उम्मीद करेंगे। इसलिए, सहयोग को और बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि वे ब्रह्मोस के विभिन्न संस्करण, अधिक उन्नत संस्करण ला सकें - न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि विश्व स्तर पर सहयोगियों के लिए भी।"

भारत को ऐसे हथियारों की आवश्यकता क्यों है, इस सवाल का जवाब देते हुए गुप्ता ने कहा, "हम एक ऐसा देश रहे हैं जिसने हजारों-हजारों सालों से आक्रमणों का सामना किया है - सभी प्रकार के आक्रमण - न केवल सैन्य आक्रमण बल्कि संस्कृति, धर्मों और ज्ञान प्रणाली पर भी आक्रमण, इसलिए हमें अपनी रक्षा करने का अधिकार है। संयोग से और सौभाग्य से, हम एक बहुत ही रणनीतिक भू-राजनीतिक क्षेत्र में स्थित हैं।"

"हिंद महासागर, दुनिया का लगभग 50 से 60 प्रतिशत व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। और दुनिया की लगभग 35-40 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताएं हिंद महासागर क्षेत्र से ही पूरी होती है। हमारे अपने मामले में, हमारे 90 प्रतिशत व्यापार मात्रा के हिसाब से इन्हीं समुद्री मार्गों से होते हैं, इसलिए हम इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते," उन्होंने आगे कहा। इसके अलावा, उन्होंने तर्क दिया कि भारत की बढ़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए - जो पहले से ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है - भारत को "सावधान" रहना चाहिए। ब्रह्मोस मिसाइल के विकास के बारे में आगे बात करते हुए गुप्ता ने कहा, "रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदा यात्रा इस अहम क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करेगी।"

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