वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज देना हमारा पहला कर्तव्य है।
नई दिल्ली। देश के बुनियादी ढांचे की मजबूत की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज देना हमारा पहला कर्तव्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गईं।
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में उछाल
वित्त मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक कैपेक्स में पिछले सालों में तेजी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2014-15 में यह महज 2 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस गति को आगे भी बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
नए वित्तीय साधनों का विकास
वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (INVIIT), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और एनआईआईएफ जैसे संस्थानों के माध्यम से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा दिया है। पिछले वर्षों में REIT ने एसेट मोनेटाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और बजट 2026-27 में इसके माध्यम से केंद्रीय पब्लिक सेक्टर कॉर्पोरेशनों के रियल एस्टेट एसेट्स की रिसाइक्लिंग तेज करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश को दिया बढ़ावा
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (INVIIT), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और एनआईआईएफ जैसे संस्थानों के माध्यम से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा दिया है। पिछले वर्षों में REIT ने एसेट मोनेटाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और बजट 2026-27 में इसके माध्यम से केंद्रीय पब्लिक सेक्टर कॉर्पोरेशनों के रियल एस्टेट एसेट्स की रिसाइक्लिंग तेज करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड का प्रस्ताव
बुनियादी ढांचे के विकास के दौरान जोखिमों को कम करने और निजी निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह फंड ऋणदाताओं को विवेकपूर्ण आंशिक क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराएगा, जिससे निजी निवेशकों को परियोजनाओं में निवेश करने में आसानी होगी।
माल ढुलाई के लिए पर्यावरण अनुकूल समाधान
इस उद्देशय को बढ़ावा देने के लिए बजट में पूरब में डानकुनी तथा पश्चिम में सूरत से कनेक्ट करने के लिए नए डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जल मार्गों (एनडब्ल्यू) को शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसकी शुरुआत ओडिशा में NW-5 से होगी, जो तलचर और अंगूल के खनिज अवयव समृद्ध क्षेत्रों और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केन्द्रों को पारादीप और धमरा के बंदरगाहों से जोड़ेगा। सरकार का उद्देश्य है कि 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्ग और तटीय शिपिंग के हिस्से को वर्तमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत तक किया जाए। इसके लिए रेल और सड़क से कार्गो ट्रैफिक को मॉडल शिफ्ट के जरिए प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्मला सीतारमण ने कहा कि जलमार्ग क्षेत्र में आवश्यक कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी। ये संस्थान युवाओं को प्रशिक्षित कर उनको रोजगार के लिए अवसर प्रदान करेंगे। इसके अलावा जहाजों की मरम्मत के लिए वाराणसी और पटना में जहाज मरम्मत के लिए इकोसिस्टम तैयार करने का भी प्रस्ताव है।
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा
पर्यावरण अनुकूल यात्री परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है। ये कॉरिडोर मुम्बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलूरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच बनेंगे।
कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS)
वित्त मंत्री ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) तकनीकों को अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों में लागू किया जाएगा। यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी और भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता देगी।
शहरी आर्थिक क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ का आवंटन
शहरों के विकास और अवसरों को ध्यान में रखते हुए टियर-II और टियर-III शहरों के साथ-साथ मंदिर-शहरों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। शहरी आर्थिक क्षेत्रों (CER) का मानचित्रण कर उनके विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा और इसके लिए अगले पांच वर्षों में प्रति क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है।
टियर-II और टियर-III शहरों पर विशेष ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि अब तक मेट्रो शहरों पर ज्यादा फोकस था, लेकिन अब बजट में टियर-II और टियर-III शहरों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर-शहरों को भी आधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से लैस करने का प्रस्ताव है। शहरी आर्थिक क्षेत्रों (CER) का मानचित्रण करके उनके विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा और इसके लिए अगले पांच वर्षों में प्रति क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित है।
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