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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PACL की करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय ने पर्ल्स ग्रुप (पीएसीएल) पर और शिकंजा कसते हुए मनी लॉन्ड्रिंग यानी कालाधन शोधन की जांच में 1986 करोड़ रुपए से ज्यादा की 37 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में pacl की करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

ED Attaches Properties Worth Rs 1,986 Crore in Money Laundering Probe |

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने पर्ल्स ग्रुप (पीएसीएल) पर और शिकंजा कसते हुए मनी लॉन्ड्रिंग यानी कालाधन शोधन की जांच में 1986 करोड़ रुपए से ज्यादा की 37 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। यह प्रॉपर्टी पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में हैं। इस कार्रवाई के बाद मामले में जब्त की गई कुल संपत्ति की कीमत 7589 करोड़ रुपये हो गई है। ईडी इस मामले की लंबे समय से जांच कर रही है।

अब तक 7,500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त

ED ने कहा कि कुर्क की गई 37 संपत्तियों की पहचान निवेशक फंड से खरीदी गई संपत्तियों के रूप में की गई है और इस प्रकार ये अपराध की कमाई है। इस कार्रवाई के साथ, ED ने अब तक भारत और विदेश में लगभग 7,589 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। ED के दिल्ली जोनल ऑफिस-II ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा 19 फरवरी, 2014 को दर्ज FIR की जांच के आधार पर यह कार्रवाई की है।

जमीन के नाम पर 60,000 करोड़ की धोखाधड़ी

उल्लेखनीय है कि ED की जांच सीबीआई के एक पुराने केस पर आधारित है। यह केस PACL लिमिटेड और उसके प्रोमोटर निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ था। भंगू की मौत अगस्त 2024 में हो चुकी है। जांच में पता चला कि आरोपी कंपनियों और लोगों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास की आड़ में एक अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाकर देश भर से लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी की और 60,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए। निवेशकों को नकद और किश्त भुगतान योजनाओं के माध्यम से निवेश करने के लिए लुभाया गया और उनसे पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को कोई जमीन नहीं दी गई है और करीब 48,000 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी बकाया है।

निवेशकों के खून-पसीने की कमाई से खरीदी संपत्तियां

इस धोखाधड़ी को छिपाने के लिए कई फ्रंट कंपनियों और फर्जी बिक्री लेनदेन का इस्तेमाल किया गया। ED ने बताया कि आगे की जांच में पता चला कि भोले-भाले निवेशकों से जमा किए गए फंड को विभिन्न संबंधित और गैर-संबंधित कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया और अंततः दिवंगत निर्मल सिंह भंगू, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों, और PACL की संबंधित कंपनियों के बैंक खातों में जमा किया गया। इन फंडों का बाद में उनके नाम पर अचल संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल किया गया।

भंगू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें

एजेंसी ने बताया कि दिवंगत निर्मल सिंह भंगू की पत्नी प्रेम कौर, बेटी बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप सिंह और करीबी सहयोगी प्रतीक कुमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। ED ने 2016 में एक ECIR दर्ज किया और 2018 में एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की, जिसके बाद 2022 और 2025 में दो सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। स्पेशल PMLA कोर्ट ने अब तक दायर की गई सभी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट का संज्ञान लिया है।

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