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खाड़ी संकट से बढ़ सकता है रसोई का खर्च

खाड़ी संकट बिगाड़ सकता है आम आदमी की रसोई का बजट

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बरकरार तनाव का असर अब देश की आम जनता पर पड़ने लगा है।

खाड़ी संकट बिगाड़ सकता है आम आदमी की रसोई का बजट

House hold Expenses |

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बरकरार तनाव का असर अब देश की आम जनता पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और डॉलर मजबूत होने के कारण देश में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। बढ़ती महंगाई की वजह से एफएमसीजी उत्पादों — साबुन, तेल, बिस्कुट, राशन और रोजमर्रा के उपयोग की चीजों के दाम बढ़ने के आसार हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

मध्य पूर्व एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड वायदा में 4.2 प्रतिशत तक का उछाल आया है और यह 105.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इसी प्रकार वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 99 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया। एक हफ्ते पहले क्रूड की कीमत 114 डॉलर तक पहुंच गई थी। इस वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर होकर 95 रुपये पार पहुंच गया है।

पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैकेजिंग सामग्री और रसद महंगी हो गई है। साथ ही ईंधन की कीमतों में तेजी के कारण माल ढुलाई महंगी हो गई है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन लागत बढ़ गई है। विभिन्न एफएमसीजी कंपनियों की 2026 की पहली तिमाही (Q1) की रिपोर्टों के अनुसार, बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत, कच्चे माल की ऊंची कीमतों और पैकेजिंग सामग्री में महंगाई के कारण साबुन, तेल, बिस्किट और अन्य रोजमर्रा के घरेलू सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।

पाम ऑयल और जरूरी वस्तुओं पर असर

खाड़ी संकट के कारण पाम ऑयल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने कंपनियों की उत्पादन लागत को प्रभावित किया है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन और खाद्य तेल जैसे एफएमसीजी उत्पादों की महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।

कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम

माना जा रहा है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण एफएमसीजी कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इसमें साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट, शैम्पू और अन्य पैकेज्ड फूड शामिल हैं। कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है। इसे कम करने के लिए कंपनियां कीमतें बढ़ाने या फिर पैकेट का वजन कम करने यानी “श्रिंकफ्लेशन” की रणनीति अपना सकती हैं।

मध्यम वर्ग के बजट पर बढ़ेगा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक घरेलू बजट पर पड़ेगा। रोजमर्रा की जरूरतों पर अधिक खर्च होने से आम लोगों की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया के ग्लोबल चीफ एग्जीक्यूटिव मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अगली तिमाही में कीमतों में बढ़ोतरी का एक और दौर देखने को मिल सकता है। उन्होंने बताया कि पैकेजिंग मटीरियल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है। डाबर ने मौजूदा तिमाही में ही कीमतों में करीब 4 फीसदी की बढ़ोतरी की है और आने वाले समय में इसमें और इजाफा हो सकता है।

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