नई दिल्ली। भारत ने चीन से मशीनों के आयात फिर से शुरू करने का फैसला किया है। भारत ने वर्ष 2020 में गलवान में सीमा संघर्ष के बाद चीन से मशीनों का आयात बंद कर दिया था।
नई दिल्ली। भारत ने चीन से मशीनों के आयात फिर से शुरू करने का फैसला किया है। भारत ने वर्ष 2020 में गलवान में सीमा संघर्ष के बाद चीन से मशीनों का आयात बंद कर दिया था। पर अब पांच साल बाद चीनी उपकरणों की खरीद पर लगे प्रतिबंध में ढील देने का निर्णय लिया गया है। केन्द्र सरकार ने यह फैसला आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण पावर और कोयला सेक्टर में अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लिया है। सरकार ने चीन से बिजली मशीनों और उपकरणों के सीमित आयात को हरी झंडी दे दी है। भारत ने 2020 में गलवान झड़प के बाद चीनी कंपनियों पर सख्त पाबंदियां लगाई थीं। उन्हें सरकारी पैनल में रजिस्ट्रेशन और सुरक्षा मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया था। इससे भारत के करीब 750 अरब डॉलर के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मार्केट में चीनी कंपनियों की एंट्री लगभग बंद हो गई थी। अब 5 साल बाद पाबंदियों में पहली बड़ी ढील दी गई है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बहाल होने की संभावनाओं के बीच चीन ने भी भारत को रेयर अर्थ मैग्नेट्स के साथ उर्वरकों की सप्लाई फिर से बढ़ा दी है।
कोयला-पावर उपकरणों में कमी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोयला सेक्टर के कुछ जरूरी इक्विपमेंट के लिए भी तय समय की छूट देने पर विचार चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर रोक जारी रहती, तो देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ता। इस संबंध में जल्द औपचारिक आदेश जारी हो सकता है। एक आकलन के अनुसार पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स में अगले तीन साल में ट्रांसफॉर्मर और रिएक्टर जैसे इक्विपमेंट की करीब 40% कमी की आशंका है, जिससे कई परियोजनाएं अटक रही हैं। सूत्रों ने बताया कि उपकरणों की कमी के बावजूद सरकार पूरी तरह से चीनी मशीनों के लिए दरवाजे नहीं खोल रही है। जरूरी उपकरणों के आयात को केस-टू-केस आधार पर मंजूरी दी जा सकती है।
सरकारी कंपनियों को आयात छूट
सरकारी अधिकारियों ने बताया, इस ढील के तहत सरकारी बिजली और कोयला कंपनियों को सीमित आयात शुरू करने की अनुमति मिल गई है, क्योंकि जरूरी उपकरणों की कमी से परियोजनाएं पूरी होने में देरी हो रही है। इसे देखते हुए केन्द्र ने अब सरकारी संस्थाओं को मंजूरी के बिना चीन से बिजली ट्रांसमिशन घटक खरीदने की अनुमति दे दी है। पांच साल पुराने प्रतिबंधों के बाद यह पहली महत्वपूर्ण ढील है। सूत्रों ने जनवरी में कहा था कि सीमा पर तनाव कम होने के साथ ही भारत सरकारी अनुबंधों के लिए चीनी बोलीदाताओं को व्यापक छूट देने पर विचार कर रहा है।
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