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ऊर्जा संकट ने बढ़ाई सरकार की चिंता

खाड़ी संकट के कारण 42 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक महंगाई

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में भारी उछाल के कारण भारत में थोक महंगाई दर (WPI) बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

खाड़ी संकट के कारण 42 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक महंगाई

India WPI Inflation Jumps to 8.3% on Oil and LNG Surge |

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतों में भारी उछाल के कारण भारत में थोक महंगाई दर (WPI) बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। देश में थोक महंगाई दर (WPI) अप्रैल 2026 में बढ़कर 8.3% के स्तर पर पहुंच गयी। यह पिछले 42-महीने (साढ़े 3 साल) में मंहगाई का उच्चतम स्तर है। पिछले माह में WPI 3.88% से रिकार्ड किया गया था। इस प्रकार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति एक महीने पहले (मार्च 2026) की तुलना में 3.86% बढ़ी है।

सरकारी अनुमान से ऊपर पहुंची महंगाई

केन्द्र सरकार द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में अमेरिका - ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत का देश की अर्थव्यवस्था पर असर अब रंग दिखाने लगा है। अप्रैल 2026 में महंगाई दर उछलकर 8.3% के लेवल पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.88% के स्तर पर थी। यह केन्द्र सरकार के 4.4% के अनुमान से काफी अधिक है। महंगाई दर में आए इस भारी उछाल का प्रमुख करण वैश्विक स्तर पर ईंधन और बिजली की कीमत में आई जबरदस्त तेजी को माना जा रहा है। थोक महंगाई दर (WPI) का यह आंकड़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा है जो न केवल सरकार बल्कि आम आदमी और आरबीआई (RBI) के लिए भी चिंता का सबब बन गया है।

ईंधन और बिजली सेगमेंट में दिखी सबसे अधिक मंहगाई

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी उथल पुथल के कारण देश में ईंधन और बिजली के सेगमेंट में सबसे अधिक मंहगाई देखने को मिली है। इस सेग्मेंट में महंगाई दर मार्च के 1.05% के मुकाबले अप्रैल में 24.71% हो गई। इसके अलावा कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इस सेगमेंट की मुद्रास्फीति पिछले महीने के 51.5% से बढ़कर अप्रैल में 88.06% हो गई। साथ ही पेट्रोल में 32.4% और डीजल 25.2% की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

खाद्य स्थिर, लेकिन गैर-खाद्य वस्तुओं में बढ़ी कीमतें

खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति अप्रैल में 1.98% पर अपेक्षाकृत स्थिर रही, जबकि मार्च में यह 1.90% थी। हालांकि, गैर-खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 12.18% हो गई, जो मार्च में 11.5% थी। ईंधन की श्रेणी में, एलपीजी की महंगाई दर मार्च में (-)1.54% से बढ़कर अप्रैल में 10.92% हो गई। पेट्रोल की महंगाई दर एक महीने पहले के 2.50% से बढ़कर 32.40% हो गई, जबकि हाई-स्पीड डीजल की महंगाई दर मार्च के 3.26% से बढ़कर 25.19% हो गई।

सरकारी नियंत्रण से आम उपभोक्ता को राहत

थोक महंगाई दर में यह उछाल ऐसे समय में आया है जब सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू खाना पकाने की गैस की खुदरा कीमतों को लगभग अपरिवर्तित रखा है। इससे परिवारों को ईंधन लागत में तत्काल वृद्धि के प्रभाव से राहत मिली है। हालांकि, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के बढ़ते दबाव को दर्शाती है।

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