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हाईकोर्ट जज पर अभद्रता का आरोप, बाद में मांगी माफी

वकीलों का आरोप: हाई कोर्ट जज ने की अभद्रता फिर चेंबर में मांगी माफी, कहा- सॉरी

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश और अधिवक्ता के बीच विवाद हो गया।

वकीलों का आरोप हाई कोर्ट जज ने की अभद्रता फिर चेंबर में मांगी माफी कहा- सॉरी

Madhya Pradesh High Court |

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब एक मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश और अधिवक्ता के बीच विवाद हो गया। कोर्ट रूम में मौजूद चश्मदीद वकीलों के अनुसार, ग्वालियर बेंच के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी जज ने सुनवाई के दौरान इस तरह की भाषा का प्रयोग किया।

​विवाद का मुख्य कारण

​अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने घटना की जानकारी देते हुए बताया​वे एक केस में पैरवी कर रहे थे और उन्होंने जज से आग्रह किया कि उनके द्वारा पेश किए गए 'केस लॉ' (Case Laws) पर विचार किया जाए।​उन्होंने दलील दी कि पिछले मामलों में इन पर विचार नहीं हो पाया था।इसी बात पर बहस बढ़ गई और जज नाराज हो गए। आरोप है कि जज ने अधिवक्ता को डिस्कनेक्ट कर दिया और अभद्र भाषा (गाली) का प्रयोग किया।

​बार काउंसिल और वकीलों ने कहा

​घटना के बाद वकीलों में भारी आक्रोश देखा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी। ​एडवोकेट प्रेम सिंह भदौरिया जो मप्र स्टेट बार काउंसिल के सदस्य हैं,  ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाद में दोनों पक्षों ने आपस में बात कर विवाद को समाप्त कर लिया है ताकि बार और बेंच के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे।​एडवोकेट पवन पाठक जो हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर के अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की घटना से न्यायपालिका की साख पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जज को वकील की किसी बात पर आपत्ति थी, तो उन्हें लिखित कार्यवाही करनी चाहिए थी, लेकिन कोर्ट रूम में जज की कुर्सी पर बैठकर अभद्र भाषा का प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं है।

​ऐसे समाप्त हुआ विवाद

कोर्ट रूम में हंगामे के बाद न्यायाधीश ने चेंबर में अधिवक्ता से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि न्यायाधीश ने घटना पर खेद जताया और 'सॉरी' भी कहा। वकीलों का कहना है कि जज का चेंबर में बुलाकर माफी मांगना यह दर्शाता है कि गलती उनकी ओर से हुई थी। न्यायिक गरिमा को बनाए रखने के लिए बार और बेंच के बीच संवाद का मर्यादित होना आवश्यक है। इस घटना ने एक बार फिर अदालती कार्यवाही के दौरान व्यवहारिक संयम पर बहस छेड़ दी है।

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