लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किए गए।
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किए गए। इन विधेयकों को पेश करने के दौरान विपक्ष ने ध्वनि मत के बजाय मत विभाजन (डिवीजन) की मांग की। लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने सदन में सदस्यों को अपनी प्रणालियों के माध्यम से 'पक्ष', 'विपक्ष' या 'अनुपस्थित' श्रेणी में वोट डालने की प्रक्रिया समझाई।
डिवीजन वोटिंग में 251 के बहुमत से विधेयकों को मिली मंजूरी
विपक्षी सदस्यों द्वारा इस कदम का विरोध किए जाने के बाद हुई वोटिंग में कुल 333 मतों में से 251 वोट पक्ष में और 185 वोट विरोध में पड़े। पक्ष में 251 मतों के बहुमत के साथ ही संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक सहित तीनों विधेयक लोकसभा में पेश कर दिए गए। आमतौर पर लोकसभा में ध्वनि मत का प्रयोग किया जाता है, लेकिन चुनौती दिए जाने पर 'विभाजन' की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें ऑटोमैटिक वोट रिकॉर्डर का उपयोग होता है। मतों के विभाजन के बाद वोट पर्चियों का भी उपयोग किया गया। इसमें 333 सदस्यों ने मतदान किया और कोई भी सदस्य अनुपस्थित नहीं रहा। पर्चियों के माध्यम से हुई गिनती के बाद भी अंतिम परिणाम 251 पक्ष और 185 विरोध में रहा।
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन के लिए विशेष सत्र
सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए इस संशोधन विधेयक पर विपक्ष का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों से इस संशोधन का समर्थन करने का आग्रह किया था ताकि 2029 के आम चुनावों से महिला आरक्षण प्रभावी हो सके। उन्होंने कहा कि यह देश की हर बहन और बेटी की इच्छा है। हमें इसे सर्वसम्मति से पूरा करना चाहिए।
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