उज्जैन। धार्मिक नगरी में आगामी 4 मार्च से भगवान महाकाल की दैनिक पूजा-विधि और दिनचर्या में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है।
उज्जैन। धार्मिक नगरी में आगामी 4 मार्च से भगवान महाकाल की दैनिक पूजा-विधि और दिनचर्या में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है। मंदिर प्रशासन और पुजारियों के अनुसार यह बदलाव परंपरा के अनुसार मौसम परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
इसलिए बदल रही दिनचर्या
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक भगवान महाकाल की सेवा-पूजा सर्दी के अनुरूप होती है। इस अवधि में भगवान का अभिषेक और स्नान गर्म जल से कराया जाता है ताकि ठंड के मौसम के अनुरूप व्यवस्था रहे। अब होली के अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी की दिनचर्या लागू होगी। इसलिए 4 मार्च से पूजा पद्धति में परिवर्तन किया जा रहा है।
भगवान के स्नान विधि में भी बदलाव
अभी तक सर्दी के कारण भगवान महाकाल का स्नान गुनगुने या गर्म जल से हो रहा है। 4 मार्च से पुजारी भगवान का स्नान ठंडे जल से कराएंगे, जो गर्मी की परंपरागत व्यवस्था का हिस्सा है।
आरती के समय में भी बदलाव
मौसम परिवर्तन के साथ मंदिर में होने वाली तीन प्रमुख आरतियों भस्म आरती, मध्याह्न आरती, संध्या आरती के समय में भी संशोधन किया जाएगा। गर्मी में दिन बड़े होने के कारण आरती के समय थोड़े आगे-पीछे किए जाते हैं ताकि दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा बनी रहे।
दर्शन, पूजा व्यवस्था में भी बदलाव
मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई समय-सारिणी लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजा के लिए उसी अनुसार योजना बनानी होगी। आमतौर पर मंदिर समय में बदलाव की सूचना पहले ही सार्वजनिक कर देता है, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को परेशानी न हो।
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