नई दिल्ली। भारत में रबी के फसली सत्र में राई-सरसों की अच्छी फसल होने से इसके उत्पादन में लगभग 3.5-3.6% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली। भारत में रबी के फसली सत्र में राई-सरसों की अच्छी फसल होने से इसके उत्पादन में लगभग 3.5-3.6% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
उत्पादन 119 लाख टन के पार पहुंचने का अनुमान
रबी सत्र 2025-26 में सरसों की पैदावार पिछले साल के मुकाबले लगभग 3.5-3.6% बढ़कर 115.2 लाख टन से अधिक होने का अनुमान है। सरसों की अच्छी पैदावार से भारत खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता हो सकता है और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
एसईए का आकलन और आंकड़ों का आधार
एक आकलन के मुताबिक रबी के फसली सत्र 2025-26 में देश में राई-सरसों का उत्पादन बढ़कर 119.4 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 115.2 लाख टन से अधिक है। यह जानकारी उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने सोमवार को दी।
सर्वे और तकनीक से जुटाए गए आंकड़े
एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने बताया कि इस अनुमान के लिए आंकड़े सरसों उत्पादक जिलों में जमीनों के सर्वेक्षण, फसल कटाई और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके इकट्ठा किए गए। सरसों की अधिक फसल घरेलू खाद्य तेल की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
लगातार बढ़ रहा है सरसों उत्पादन
एसईए ने बताया कि देश में सरसों की कमी और बाजार में किसानों को अच्छा भाव मिलने के कारण इसका उत्पादन कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। सरसों उत्पादन वर्ष 2019-20 में लगभग 86 लाख टन था और 2025-26 में करीब 120 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
खेती का रकबा और उत्पादकता भी बढ़ी
अनुमान के अनुसार, राई-सरसों का कुल क्षेत्रफल 2024-25 के 92.15 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 93.91 लाख हेक्टेयर हो गया है। औसत उत्पादकता भी बेहतर मौसम और उन्नत कृषि पद्धतियों के चलते 1,250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1,271 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है।
राज्यों में उत्पादन की स्थिति
राजस्थान देश में सरसों के उत्पादन के मामले में सबसे आगे बना हुआ है। राजस्थान में सरसों के 53.9 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। उत्तर प्रदेश में भी सरसों के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कि 18.1 लाख टन तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश का उत्पादन थोड़ा कम होकर 13.9 लाख टन और हरियाणा का उत्पादन 12.7 लाख टन तक पहुंच गया।
अन्य राज्यों में भी दिखा असर
अन्य राज्यों में, पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, जहां उत्पादन क्रमशः 7.4 लाख (6.8 लाख) और 5.9 लाख (5.4 लाख) रहने का अनुमान है। हालांकि, असम में उपज कम होने के कारण उत्पादन घटकर 2.1 लाख (2.5 लाख) रह गया है, जबकि बिहार में उत्पादन लगभग स्थिर रहा है और 0.9 लाख पर बना हुआ है।
कृषि सुधार और नीतियों का प्रभाव
एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा कि 2019-20 में लगभग 86 लीटर से बढ़कर चालू वर्ष में लगभग 120 लीटर तक उत्पादन में वृद्धि बेहतर कृषि पद्धतियों, किसानों की बेहतर जागरूकता और अनुकूल नीतिगत समर्थन का प्रमाण है।
अंतिम आंकड़े अभी अस्थायी
एसईए, मुंबई के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता ने कहा कि ये अनुमान अस्थायी हैं और आगे के फील्ड सर्वे और अद्यतन आंकड़ों के आधार पर संशोधित किए जा सकते हैं।
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