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यूपी में कैब सेवाओं पर लगाम, नई नीति तैयार

यूपी में कैब सेवाओं पर लगाम लगाने को बनेगी नई पॉलिसी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा का खास ध्यान में रखते हुए मोबाइल एप आधारित कैब सर्विस में सुरक्षा के उपायों के साथ उनके किरायों पर नियंत्रण की योजना तैयार कर रही है।

यूपी में कैब सेवाओं पर लगाम लगाने को बनेगी नई पॉलिसी

Transport Department |

यूपी में कैब सेवाओं के लिए नई नीति

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा का खास ध्यान में रखते हुए मोबाइल एप आधारित कैब सर्विस में सुरक्षा के उपायों के साथ उनके किरायों पर नियंत्रण की योजना तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य ओला, उबर सहित सभी एप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन को नियमों के तहत लाना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यूपी के परिवहन विभाग का मानना है कि अब तक किसी स्पष्ट नीति के अभाव में इस क्षेत्र में कई तरह की अनियमितताएं सामने आती रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य में ऐप आधारित कैब सेवाओं को लेकर पहली बार एक समग्र नीति लागू करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में ऐप-आधारित मोटर वाहन एग्रीगेटरों (जैसे ओला, उबर, रैपिडो, आदि) को एक औपचारिक नियामक ढांचे के अंतर्गत लाने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल विकसित करने की योजना है। 

कैब नीति में सुरक्षा व पंजीकरण अनिवार्य

यूपी की परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने कहा कि यह नीति काफी हद तक केंद्र द्वारा जून-जुलाई 2025 में जारी मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देशों पर आधारित होगी, जिसमें राज्यों को कुछ संभावित छूट दी जा सकती है।”राज्य सरकार का मानना है कि राज्य केंद्र के मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप अपनी स्वयं की एग्रीगेटर नीति बनाने और लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसे देख राज्य में संचालित सभी एप आधारित कैब एग्रीगेटरों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इस पहल का उद्देश्य दोपहिया और चार पहिया टैक्सी सेवाओं के लाइसेंसिंग को सुव्यवस्थित करना, सर्ज प्राइसिंग को विनियमित करना और यात्रियों की सुरक्षा, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस योजना के बाद कैब में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और 24×7 कंट्रोल रूम से जुड़ी व्यवस्था को जरूरी किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को तुरंत सहायता मिल सके। इस योजना के अंतर्गत वेब पोर्टल विकसित करने का कार्य "यूपीडेस्को" को  सौंपा गया है। सरकार ने सोमवार को एक आदेश जारी कर इस कार्य के लिए एजेंसी को अग्रिम राशि के रूप में 1.42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की। प्रस्तावित नीति में महिला यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। ड्राइवरों के लिए पुलिस सत्यापन और निर्धारित प्रशिक्षण अनिवार्य शर्त होगी। इसके साथ ही वाहन की फिटनेस, बीमा, ड्राइवरों की योग्यता और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा।

किराया नियंत्रण व शिकायत तंत्र का प्रावधान

यूपी परिवहन विभाग की प्रस्तावित नीति में पीक ऑवर में मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने पर रोक लगाने और अधिकतम व न्यूनतम किराया सीमा तय करने का भी प्रावधान किया जा सकता है। इसके अलावा, उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस नीति से जहां एक ओर यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद परिवहन सेवा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों को भी स्पष्ट नियमों के तहत काम करने का अवसर मिलेगा। नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इसे कैब एग्रीगेटरों व अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। परिवहन विभाग के अनुसार, इस नीति से यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद परिवहन सेवा मिलेगी, वहीं एप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों को भी स्पष्ट नियमों के तहत काम करने का अवसर मिलेगा। नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है और कैब एग्रीगेटरों व अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

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