केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंडर रिकवरी के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर दिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंडर रिकवरी (लागत से कम पर बिक्री) के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर दिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार दुनिया भर में आई रुकावटों के बावजूद फ्यूल की सप्लाई को स्थिर रखने में कामयाब रही है।
अंडर रिकवरी ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान
CII एनुअल बिज़नेस समिट 2026 में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फ्यूल पर अंडर रिकवरी लगभग ₹1,98,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि तिमाही नुकसान लगभग ₹1 लाख करोड़ होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें पहले के लगभग USD 64-65 प्रति बैरल के लेवल से तेज़ी से बढ़कर लगभग USD 115 प्रति बैरल हो गई हैं।
हर दिन ₹1000 करोड़ घाटे का दावा
उन्होंने कहा, "अगर आप वित्तीय स्थिति को देखें, अगर आप इस तथ्य को देखें कि तेल कंपनियां प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही हैं, तो वसूली न हो पाने की स्थिति में 1,98,000 करोड़ रुपये का घाटा होगा। तिमाही के हिसाब से देखें तो घाटा 1 लाख करोड़ रुपये है। ऐसे में आप इसे कब तक ऐसे ही चलने दे सकते हैं? तेल की कीमत कहां है? यह पहले लगभग 64 या 65 डॉलर हुआ करती थी। अब यह बढ़कर 115 डॉलर तक पहुंच गई है।”
वैश्विक संकट के बावजूद फ्यूल सप्लाई रही सामान्य
उन्होंने कहा कि ग्लोबल डेवलपमेंट के कारण पिछले 75 दिन चुनौतीपूर्ण रहे हैं लेकिन भारत ने बिना रुकावट एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित की है। पुरी ने भारत के एनर्जी सेक्टर और इंपोर्ट चल रही अफवाहों का भी जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "बहुत सारी गलतफहमियां फैली हुई हैं। मैंने अभी एक आर्टिकल पढ़ा जिसमें कहा गया है कि भारत ने रशियन फेडरेशन से LNG कंसाइनमेंट इंपोर्ट करने से मना कर दिया। हमने कभी रूस से LNG इंपोर्ट नहीं किया है।" मंत्री ने बताया कि भारत न सिर्फ़ एक बड़ा एनर्जी इंपोर्टर है, बल्कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का चौथा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर भी है।
चार साल से नहीं बढ़ीं घरेलू ईंधन कीमतें
घरेलू ईंधन की कीमतों का ज़िक्र करते हुए पुरी ने कहा कि भारत ने 2022 से ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। उन्होंने कहा, "अगर मुझे ठीक से याद है, तो हमने पिछले चार सालों से कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। हम दुनिया में अकेले ऐसे देश हैं। ईंधन की कीमतों के फ़ैसले चुनावों से जुड़े नहीं होते हैं।"
होर्मुज संकट के बीच भारत ने बढ़ाया LPG उत्पादन
मंत्री ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास रुकावटों के असर के बारे में भी बात की, जिससे ग्लोबल एनर्जी ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 60 फीसदी LPG पहले होर्मुज स्ट्रेट से आती थी। अब अन्य विकल्पों का इंतज़ाम करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने संकट के समय में घरेलू LPG उत्पादन को लगभग 35,000-36,000 मीट्रिक टन प्रति दिन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन प्रति दिन कर दिया। मंत्री के मुताबिक, ग्लोबल टेंशन और सप्लाई में रुकावट के बावजूद देश में कहीं भी पेट्रोल, डीज़ल या LPG की कमी नहीं हुई है।
देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की कोई कमी नहीं
उन्होंने कहा कि देश के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीज़ल है। LPG की भी पर्याप्त सप्लाई है। उन्होंने आगे कहा कि मुश्किल समय में भी पेट्रोल की खपत 6 फीसदी बढ़ी है जबकि सरकार सप्लाई मैनेजमेंट के तरीकों से LPG की खपत को थोड़ा कम करने में भी कामयाब रही है। पुरी ने कहा कि ग्लोबल उतार-चढ़ाव और कुछ लोगों द्वारा फ्यूल सप्लाई को लेकर अफवाहें फैलाने और पैनिक पैदा करने की कोशिशों के बावजूद भारत का एनर्जी सेक्टर मज़बूत बना हुआ है।
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