पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी इजाफ़ा हुआ है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी इजाफ़ा हुआ है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। देश में क्रूड की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है जिससे कच्चे तेल को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने के संकेत
देश में बढ़ रहे ऊर्जा संकट के बीच केन्द्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा संकेत दिया है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने एक बयान में कहा कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। हरदीप पुरी ने यह बात "CII एनुअल बिजनेस समिट 2026" में कही।
चार साल से स्थिर कीमतें
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें चार साल से स्थिर हैं। लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति फिलहाल सामान्य है।
कंपनियों पर भारी घाटा
मंत्री ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का क्रूड और 45 दिनों का एलपीजी बफर स्टॉक मौजूद है, इसलिए ईंधन की कोई कमी नहीं है। लेकिन तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इस समय रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
अंडर-रिकवरी में भारी बढ़ोतरी
हरदीप पुरी ने बताया कि मौजूदा तिमाही का घाटा ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। वहीं अंडर-रिकवरी बढ़कर 1,98,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष का पूरा मुनाफा भी इस नुकसान में खत्म हो गया है।
चुनावों से जोड़ने पर सफाई
मंत्री ने कहा कि कीमतों और चुनावों के बीच किसी भी तरह का संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पिछले चार सालों से कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन भविष्य में कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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