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सरकारी बैंकों ने FY26 में 1.98 लाख करोड़ कमाए

लगातार चौथे साल मुनाफे में रहे सरकारी बैंक, FY26 में कमाए 1.98 लाख करोड़ रुपये

देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक गतिविधियों में नरमी के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है।

लगातार चौथे साल मुनाफे में रहे सरकारी बैंक fy26 में कमाए 198 लाख करोड़ रुपये

Indian Economy |

नई दिल्ली। देश में आर्थिक सुस्ती और औद्योगिक गतिविधियों में नरमी के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। सरकारी बैंकों ने इस दौरान 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लाभ में रहे हैं। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, मजबूत कर्ज वृद्धि और परिचालन दक्षता में सुधार इसकी प्रमुख वजहें रहीं।

11 फीसदी बढ़ा शुद्ध लाभ

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 11.1 फीसदी बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान बैंकों का सकल एनपीए (Gross NPA) अनुपात घटकर 1.93 फीसदी और शुद्ध एनपीए (Net NPA) 0.39 फीसदी पर आ गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

कारोबार और कर्ज वितरण में मजबूत बढ़त

समीक्षा अवधि में पीएसबी का कुल कारोबार 12.8 फीसदी बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंकों की कर्ज वृद्धि 15.7 फीसदी बढ़कर 127 लाख करोड़ रुपये रही। इसमें खुदरा, कृषि और एमएसएमई सेक्टर में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

जमा राशि में भी बढ़ोतरी

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक सरकारी बैंकों में जमा राशि 10.6 फीसदी बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, नए फंसे हुए कर्ज (NPA) में लगातार कमी दर्ज की गई और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 86,971 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई।

जोखिम प्रबंधन और प्रोविजनिंग में सुधार

सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों ने 90 फीसदी से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज अनुपात बनाए रखा। यह बेहतर अंडरराइटिंग मानकों, प्रभावी जोखिम प्रबंधन प्रणाली और मजबूत बैलेंस शीट को दर्शाता है।

पूंजी स्थिति भी रही मजबूत

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल सीआरएआर (CRAR) बढ़कर 16.6 फीसदी हो गया। यह वृद्धि आंतरिक आय, संचित लाभ और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 50,551 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने से संभव हुई। सभी सरकारी बैंकों का सीआरएआर 11.5 फीसदी की नियामक आवश्यकता से काफी ऊपर रहा, जिससे भविष्य में ऋण वृद्धि के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ।

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