विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोटापे के इलाज के लिए GLP-1 (जैसे सेमाग्लूटाइड, लिराग्लूटाइड) दवाओं के उपयोग पर अपनी पहली आधिकारिक गाइडलाइन जारी की है।
GLP-1 दवाओं के इस्तेमाल पर पहली बार दिशा-निर्देश जारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मोटापे के इलाज के लिए GLP-1 (जैसे सेमाग्लूटाइड, लिराग्लूटाइड) दवाओं के उपयोग पर अपनी पहली आधिकारिक गाइडलाइन जारी की है। इन दवाओं को अब आहार, व्यायाम और लंबी अवधि की चिकित्सा प्रक्रिया का हिस्सा माना गया है।
किन लोगों को मिलेगी दवा की सलाह?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार ये नई गाइडलाइन उन वयस्कों पर लागू होंगी—
- जिनका BMI 30 या उससे अधिक है।
- या फिर जिनका BMI 27 से अधिक है और वह मोटापे से जुड़ी किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त हैं।
दुनिया में एक अरब से अधिक लोग मोटापे का शिकार
विश्व स्तर पर मोटापा एक तेज़ी से फैलती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है।
- दुनिया में 1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे से पीड़ित हैं।
- साल 2024 में 37 लाख लोगों की मौत, मोटापे से जुड़ी बीमारियों के कारण दर्ज की गई।
डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि सख़्त कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक मोटापे के मामले दोगुने हो सकते हैं। इससे वैश्विक हेल्थकेयर सिस्टम पर भारी दबाव पड़ेगा और लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर सालाना का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
एक बढ़ती हुई वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती
डब्ल्यूएचओ के इस कदम का असर—
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों
- बीमा कवरेज
- और उपचार पद्धतियों
पर सीधा देखा जा सकता है। क्योंकि दुनियाभर में वजन घटाने वाले प्रभावी इलाजों की मांग लगातार बढ़ रही है।
“मोटापा एक दीर्घकालिक बीमारी है” – डब्ल्यूएचओ महानिदेशक
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा—
“मोटापा एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। यह एक chronic disease है, जिसे आजीवन देखभाल की आवश्यकता होती है।” उन्होंने कहा कि अकेले दवाएँ इस समस्या को खत्म नहीं कर सकतीं, लेकिन GLP-1 थेरेपी लाखों लोगों को मोटापे पर काबू पाने और इससे जुड़े खतरों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
सिर्फ जीवनशैली नहीं — एक जटिल चिकित्सा स्थिति
डब्ल्यूएचओ के अनुसार मोटापा सिर्फ गलत खान-पान का परिणाम नहीं, बल्कि एक जटिल और दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थिति है।
इसमें शामिल होते हैं—
- अनुवांशिक कारण
- पर्यावरण
- जैविक कारक
- सामाजिक परिस्थितियाँ
मोटापा दिल की बीमारियाँ, टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर और कई गंभीर रोगों के जोखिम को बढ़ाता है। इसके साथ ही यह संक्रामक रोगों को और घातक बना सकता है।
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