उज्जैन।विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है।
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। शहर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए अभूतपूर्व व्यवस्थाएं की गई हैं। भगवान महाकाल अपने भक्तों को लगातार 44 घंटे तक दर्शन देंगे। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास है क्योंकि ज्योतिष गणना के अनुसार, करीब 500 साल बाद इस दिन 8 दुर्लभ योग (जिनमें 4 राजयोग भी शामिल हैं) का अद्भुत संगम हो रहा है।
महाकालेश्वर मंदिर में नौ दिनों का भव्य उत्सव होता है, जिसे 'शिव नवरात्रि' कहा जाता है। इस दौरान बाबा महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होते हैं।महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाकाल मंदिर रविवार (15 फरवरी 2026) तड़के रात 2:30 बजे मंदिर के पट खोल दिए गए।मंदिर के पट 16 फरवरी की रात 11 बजे तक लगातार खुले रहेंगे। इससे श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
महाशिवरात्रि के विशेष अनुष्ठान
1. साल में एक बार होती है'दोपहर की भस्म आरती'
सामान्यतः भस्म आरती प्रतिदिन तड़के सुबह (प्रातः काल) होती है, लेकिन महाशिवरात्रि के अगले दिन की परंपरा बिल्कुल अलग है।
निशीथ काल पूजा: शिवरात्रि की पूरी रात बाबा का विशेष अभिषेक और पूजन चलता है।
सेहरा दर्शन: सुबह तड़के बाबा महाकाल को सवा मन के फूलों का सेहरा बांधा जाता है और उन्हें दूल्हे के रूप में सजाया जाता है।16 फरवरी (सोमवार) को सुबह सेहरा दर्शन के बाद, दोपहर लगभग 12:00 बजे विशेष भस्म आरती होगी। यह पूरे वर्ष में इकलौता दिन होता है जब दोपहर में भस्म आरती की जाती है।
2. पंचामृत अभिषेक और पूजा-
शिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल का सतत जलधारा और पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद) से अभिषेक होता है। इसके बाद उन्हें भांग, सूखे मेवों और चंदन से विशेष रूप से सजाया जाता है।
शिव नवरात्रि के नौ रूप-
महाशिवरात्रि से पहले के 9 दिनों में बाबा महाकाल रोज नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इन रूपों की महिमा-
चंद्रमौलेश्वर रूप, कोटेश्वर रूप,शेषनाग अवतार,मनमहेश रूप,उमा-महेश रूप,होलकर रूप,छबीना रूप, शिवतांडव रूप और सप्तधान्य रूप (महाशिवरात्रि का मुख्य श्रृंगार)।
प्रसादम: मंदिर प्रशासन ने लाखों भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और लड्डू प्रसादम की व्यापक व्यवस्था की है।
लाइव दर्शन: उज्जैन प्रशासन ने पूरे शहर में बड़ी एलईडी स्क्रीन्स लगाई हैं। यहां से दर्शन होंगे।
एक रोचक तथ्य: उज्जैन में ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन महाकाल स्वयं प्रजा का हाल जानने निकलते हैं, इसलिए यहाँ की व्यवस्था और सुरक्षा को 'राजा' के सत्कार की तरह देखा जाता है।
भीड़ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम-
अनुमान है कि इस महापर्व पर 10 लाख से अधिक भक्त उज्जैन पहुंचेंगे। रविवार का दिन होने के कारण भीड़ अधिक होगी।सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4000 से अधिक कर्मचारियों और पुलिस बल को तैनात किया गया है।पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है।प्रशासन ने इस बार ऐसी व्यवस्था की है कि कतार में लगने के बाद श्रद्धालु लगभग 40 मिनट में बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।भारी भीड़ के चलते शहर के लगभग सभी होटल, लॉज और होम-स्टे पहले से ही पूरी तरह बुक हो चुके हैं।भक्तों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार और पार्किंग जोन बनाए गए हैं।
75 रु. में महाकाल में जल अर्पित करने का फर्जी दावा
महाशिवरात्रि के पावन पर्व से पहले महाकाल मंदिर के नाम पर ठगी का एक मामला सामने आया है। एक मोबाइल ऐप से भ्रामक दावा किया जा रहा था कि श्रद्धालु मात्र 75 रुपये देकर भगवान महाकाल को जल अर्पित कर सकते हैं। 'Sri Mandir' (श्री मंदिर) नाम के एक ऐप द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर यह दावा किया गया।महाकाल मंदिर समिति ने इस फर्जीवाड़े पर एक्शन लिया है। प्रशासक का कहना है कि मंदिर की ओर से ऐसी कोई सेवा शुरू नहीं की गई है और इस ऐप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मंदिर समिति ने भक्तों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी ऐप या विज्ञापन के झांसे में न आएं और दर्शन या पूजन के नाम पर किसी भी अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर पैसा न दें।
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