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सरकार से व्यापक चर्चा की मांग

परिसीमन मुद्दे पर पहले दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से करें चर्चा: शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़े जाने पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर दक्षिणी और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ व्यापक चर्चा की मांग की।

परिसीमन मुद्दे पर पहले दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से करें चर्चा शशि थरूर

Tharoor Urges Dialogue with South & Northeast on Delimitation |

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़े जाने पर चिंता जताई। उन्होंने से इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए, खासकर दक्षिणी और छोटे राज्यों के साथ।

परिसीमन के मुद्दे पर लंबी चर्चा की ज़रूरत

थरूर ने कहा, "हमें महिलाओं के लिए आरक्षण से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आप इसमें परिसीमन को क्यों शामिल कर रहे हैं? परिसीमन को लेकर कई मुद्दे और सवाल हैं।" उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इस पर लंबी चर्चा की ज़रूरत है, लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। हमारे दक्षिण भारतीय राज्यों के कई सवाल हैं।"

थरूर ने कानून के समय पर उठाया सवाल

उन्होंने इस कानून के समय पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर सरकार सिर्फ़ महिलाओं के लिए आरक्षण चाहती है, तो यह 2023 में क्यों नहीं हुआ? हम अब भी इसके लिए तैयार हैं, लेकिन आप यह परिसीमन क्यों कर रहे हैं?" इन दोनों मुद्दों को आपस में जोड़ने के खिलाफ बोलते हुए थरूर ने कहा, "यह हमारे देश की एकता का मामला है। दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर, गोवा और दूसरे छोटे राज्यों से बात करें।"

सदन में पेश हुआ संविधान संशोधन विधेयक

बता दें कि आज गुरुवार को लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया गया। इन पर विचार-विमर्श और इन्हें पारित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन विधेयकों के लिए सर्वसम्मत समर्थन मांगा। विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक पर कड़ी चिंता जताई है।

विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का किया कड़ा विरोध

विपक्षी दलों कहना है कि वे महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करने के पक्ष में हैं लेकिन परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हैं। सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन को पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया है।

333 वोटों में से पक्ष में पड़े कुल 251 वोट

अंतिम मत-विभाजन के मुताबिक कुल 333 वोटों में से 251 वोट 'पक्ष में' और 185 वोट 'विपक्ष में' पड़े। 251 वोटों के बहुमत के साथ, संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 सहित तीनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया।

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