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विदेशी मुद्रा भंडार में $9 अरब का उछाल

खाड़ी युद्ध के बावजूद 9 अरब डॉलर बढ़ा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भारतीय रुपये में हाल में आयी गिरावट के बावजूद देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.063 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।

खाड़ी युद्ध के बावजूद 9 अरब डॉलर बढ़ा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

India’s Forex Reserves Jump Despite Global Uncertainty |

मुंबई। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भारतीय रुपये में हाल में आयी गिरावट के बावजूद देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.063 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा संपत्ति और स्वर्ण भंडार में उछाल के कारण हुई है, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक मजबूत आर्थिक संकेत है।

आरबीआई आंकड़ों ने दिखाई आर्थिक मजबूती

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से आर्थिक मोर्चे पर देश की मजबूत वित्तीय स्थिति का संकेत मिला है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 को खत्म सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.063 अरब डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही कुल भंडार बढ़कर 697.121 अरब डॉलर हो गया। मुद्रा भंडार में आई यह मजबूत रिकवरी न केवल रुपये की स्थिरता को सहारा दे रही है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती भी दर्शाती है।

गिरावट के बाद फिर संभला विदेशी मुद्रा भंडार

आरबीआई के अनुसार 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट रही थी। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण लगातार कई सप्ताहों तक भंडार में गिरावट देखी गई। लेकिन तीन अप्रैल को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697.121 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।

स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा भंडार में तेज बढ़त

बीते सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में 1.784 अरब डॉलर की वृद्धि रही है और यह 552.856 अरब डॉलर हो गई हैं। स्वर्ण भंडार का मूल्य 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इस दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) 58 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर हो गए जबकि IMF के साथ रिजर्व पोजीशन 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर रही।

आरबीआई के हस्तक्षेप से रुपये को मिला सहारा

मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी रिजर्व बैंक के विशेष प्रयासों से हुई मानी जा रही है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद रुपये पर दबाव बढ़ गया था। हालांकि RBI ने इस दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर स्थिति संभालने की कोशिश की और रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कई नीतिगत कदम भी उठाए। इसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आये हैं।

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