Supreme Court : जूनियर इंजीनियर पद पर भर्ती के लिए योग्यता यदि डिप्लोमा निर्धारित की गई है तो डिग्री धारकों को इस पद के लिए पात्र नहीं माना जा सकता। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के..
अब जेई भर्ती में बीटेक डिग्रीधारी नहीं हो सकेंगे शामिल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई मुहर |
Supreme Court : जूनियर इंजीनियर पद पर भर्ती के लिए योग्यता यदि डिप्लोमा निर्धारित की गई है तो डिग्री धारकों को इस पद के लिए पात्र नहीं माना जा सकता। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बीटेक डिग्रीधारकों द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला देते हुए दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाई है।
यूपी लोक सेवा आयोग ने जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। यह भर्ती सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग और भू-जल विभाग के लिए निकाली गई थी। आयोग ने इस भर्ती प्रक्रिया में आये बीटेक डिग्रीधारकों को आवेदन से वंचित्त कर दिया था। आयोग की भर्ती नियमों के अनुसार, पात्रता के लिए सिर्फ डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनिवार्य था। इस आधार पर डिग्री धारकों का आवेदन निरस्त कर दिया गया था। आयोग के इस फैसले के खिलाफ राहत के लिए बीटेक डिग्रीधारकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। डिग्रीधारकों का तर्क था, उच्च योग्यता (डिग्री) रखने के बावजूद उन्हें डिप्लोमा धारकों की श्रेणी में आवेदन का अवसर मिलना चाहिए था। उनका कहना था कि भर्ती नियम असांविधानिक है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सुनवाई के बाद 22 नवंबर, 2019 को सुनाए फैसले में कहा था कि जब पात्रता सिर्फ डिप्लोमा निर्धारित की गई थी तो डिग्री धारकों को पात्र नाहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता निर्धारित योग्यता के अनुरूप नहीं है इसलिए उनकी याचिका विचार योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में डिग्री धारकों की अपील खारिज कर हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी है।
डिप्लोमा और डिग्री
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि डिप्लोमा और डिग्री दो अलग-अलग योग्यताएं हैं। डिग्री को डिप्लोमा का उच्च संस्करण नहीं माना जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बीटेक डिग्रीधारकों की याचिकाएं खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने यूपी में जूनियर इंजीनियर पदों पर तय भर्ती नियम को जायज बताया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) पदों पर भर्ती के लिए सिर्फ डिप्लोमा धारकों को पात्र बनाने के उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के निर्णय पर मुहर लगा दी है।
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से मना कर दिया
यूपी में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) पदों पर तय भर्ती नियम जायज याचिकाकर्ताओं के वकील निखिल गोयल और आशुतोष घड़े की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से मना कर दिया। इस मामले में यूपी लोक सेवा आयोग ने जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। यह भर्ती सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई विभाग और भू-जल विभाग के लिए निकाली गई थी।
हाईकोर्ट ने दीपक सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2019) मामले में पूर्ण पीठ के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था-डिप्लोमा और डिग्री अलग-अलग योग्यताएं हैं। डिग्री को डिप्लोमा का उच्च संस्करण नहीं माना जा सकता। जब नियम स्पष्ट रूप से डिप्लोमा योग्यता को आवश्यक बताते हैं तो डिग्रीधारक कानूनी रूप से अपात्र है।
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