अमेरिकी लॉबी ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर के उस ताजे दावे की हवा निकाल दी कि 'आपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने युद्धविराम के लिए अमेरिका से संपर्क साधा था।
नई दिल्ली। अमेरिकी लॉबी ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर के उस ताजे दावे की हवा निकाल दी कि 'आपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने युद्धविराम के लिए अमेरिका से संपर्क साधा था। जनरल मुनीर के दावे के ठीक उलट अमेरिकी लॉबी का कहना है कि इस्लामाबाद ने राजनयिक और सुरक्षा संबंधों का जबर्दस्त इस्तेमाल करते हुए अमेरिका से संपर्क था।
डॉन की रिपोर्ट में युद्धविराम पर पाकिस्तान का दावा
रावलपिंडी में रविवार को एक समारोह में 'स्वप्रोन्नत' फील्ड मार्शल जनरल मुनीर ने कहा था कि भारत ने अमेरिकी नेतृत्व के माध्यम से मध्यस्थता की इच्छा व्यक्त थी। इसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के हित में स्वीकार कर लिया। पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'डॉन' ने यह खबर दी है।
एफएआरए रिकॉर्ड्स ने उजागर की पाकिस्तान की सक्रिय लॉबिंग
अमेरिकी विदेश एजेंट रजिस्ट्रेशन (एफएआरए) एक्ट के तहत दर्ज फाइलों की न्यूज एजेंसी 'एएनआई' ने पड़ताल की तो यह तथ्य सामने आया कि 6-9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान ने 60 संवाद दर्ज कराए। ये संवाद-बातचीत अमेरिकी सांसदों, कांग्रेस के सहयोगियों, रक्षा से जुड़े बड़े पदाधिकारियों, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पत्रकारों के साथ दर्ज हैं। जनरल मुनीर के दावे के ठीक उलट रिकॉर्ड इस बात के संकेत देते हैं कि भारत ने जब 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया तभी से पाकिस्तान ने सक्रिय रूप से वाशिंगटन में राजनीतिक हस्तियों से संपर्क में था। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि भारत ने पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' कार्रवाई की थी। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे पर हमले किए गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने आतंक ढांचे पर किया प्रहार
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत ने स्पष्ट किया था कि ऑपरेशन में सेना के तीनों अंगों ने भाग लिया और उसका उद्देश्य पूरे पाकिस्तान और पाक कधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि 6-7 मई 2025 की दरम्यानी रात में भारतीय सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई की थी। वक्तव्य में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान के किसी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया। बताया गया था कि कार्रवाई सिर्फ केंद्रित, नपीतुली थी। यह कार्रवार्ई तनाव न बढ़ाने वाली थी।
वाशिंगटन में लगातार बैठकों की कोशिश करता रहा पाकिस्तान
रिकॉर्ड से पता चलता है कि कई बातचीत पाकिस्तान के राजदूत के लिए बैठकें आयोजित करने के अनुरोध वाले थे, जिनमें से कई प्रविष्टियों को 'राजदूत के साथ बैठक का अनुरोध' के रूप में वर्णित किया गया है। 7 और 8 मई तक, दाखिल किए गए दस्तावेजों में 'क्षेत्र में तनाव' से संबंधित चर्चाओं का उल्लेख अधिक होने लगा था।
तनाव बढ़ने के साथ अमेरिकी संपर्कों में आई तेजी
सूचीबद्ध संपर्कों में अमेरिकी सैन्य अनुभवी ब्रायन मास्ट, प्रतिनिधि सभा के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज़ से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सीनेट के बहुमत नेता जॉन थून के कार्यालय के कर्मचारी शामिल थे। दस्तावेजों में प्रतिनिधि सभा के बहुमत नेता स्टीव स्केलिस से जुड़े सलाहकारों से संपर्क का भी उल्लेख किया गया है। 9 मई को गतिविधि तेज हो गई, जिसमें कई प्रविष्टियों पर 'रक्षा अटैची की बैठक का अनुरोध' अंकित था।
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने पर दिया जोर
वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के अनुसार, देश के रक्षा अटैची ब्रिगेडियर इरफान अली हैं। इन दस्तावेजों में पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव बढ़ने की अवधि के में वाशिंगटन में भारत और पाकिस्तान द्वारा अपनाए गए अलग-अलग दृष्टिकोणों पर भी प्रकाश डाला गया है। एएनआई द्वारा समीक्षा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद अमेरिका में भारत की सक्रियता आतंकवाद की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा और उस हमले के खिलाफ राजनयिक समर्थन प्राप्त करने पर केंद्रित थी, जिसे भारत ने 'बर्बर'हमला बताया था। इसमें 26 नागरिक, 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए थे।
युद्धविराम की असली कहानी
दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि इसी अवधि के दौरान एक साक्षात्कार के संबंध में एक प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र के पत्रकार के साथ समन्वय किया गया था। ये खुलासे सीएनएन की पहले की रिपोर्टिंग से मेल खाते हैं, जिसमें बताया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों से युद्धविराम पर बातचीत चल रही थी। हालांकि, अंततः दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन के माध्यम से संचार के बाद शत्रुता समाप्त करने पर सहमति बनी।
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