पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की वजह से भारत में मंहगाई का खतरा मंडराने लगा है। खुदरा मंहगाई के बाद अब थोक महंगाई में हुई वृद्धि ने रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ा दी है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की वजह से भारत में मंहगाई का खतरा मंडराने लगा है। खुदरा मंहगाई के बाद अब थोक महंगाई में हुई वृद्धि ने रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल के कारण मार्च में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 3.88% तक पहुंच गई है।
तीन साल का उच्चतम स्तर, अनुमान से भी ज्यादा
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 3.88 फीसदी पहुंच गई। यह तीन साल का सर्वोच्च स्तर है और लगातार पांचवें महीने इसमें वृद्धि हुई है। फरवरी में यह 2.13 फीसदी और मार्च 2025 में 2.25 फीसदी थी। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 3.04 प्रतिशत के अनुमान से भी ऊपर रहा।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण परिवहन और उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कीमतें करीब 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि अब यह घटकर लगभग 95 डॉलर के आसपास आ गई हैं। इसके बावजूद उत्पादन लागत पर इसका असर कुछ समय तक बना रहेगा।
रोजमर्रा की वस्तुएं हो सकती हैं महंगी
माना जा रहा है कि इसका असर खाद्य सामग्रियों, पैकेजिंग और खाद्य तेल सहित रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ेगा और इनके दाम में 15-20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले दिनों में एफएमसीजी, पेंट और कपड़ा उद्योगों के उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
कच्चे पेट्रोलियम और गैस बनी बड़ी वजह
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, विनिर्मित उत्पादों, गैर-खाद्य और आधारभूत धातुओं की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण रही। कच्चे तेल की महंगाई दर बढ़कर 51.57 फीसदी हो गई। प्रारंभिक वस्तुओं की महंगाई 3.27 फीसदी से बढ़कर 6.36 फीसदी हो गई।
विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी हो गई, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। 22 विनिर्माण समूहों में से 16 में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ईंधन-बिजली में सुधार, सब्जियां सस्ती
ईंधन और बिजली श्रेणी में बड़ा बदलाव देखने को मिला। फरवरी में 3.78 फीसदी की गिरावट के मुकाबले मार्च में इस खंड की महंगाई 1.05 फीसदी पहुंच गई। वहीं सब्जियों की महंगाई दर घटकर 1.45% रह गई, जो फरवरी में 4.73% थी।
सीपीआई तुलना में भी उच्च स्तर
मार्च के ये आंकड़े अद्यतन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला के तीसरे आंकड़े हैं। पिछली श्रृंखला के मुकाबले यह महंगाई दर 13 महीने के उच्च स्तर पर है। इससे पहले मार्च 2025 में यह 3.56 प्रतिशत थी।
आरबीआई पर बढ़ा दबाव
खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई में वृद्धि ने आरबीआई की चिंता बढ़ा दी है। खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने केंद्रीय बैंक की मुद्रास्फीति नियंत्रण नीति पर दबाव डाला है।
ब्याज दरों पर क्या होगा फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आरबीआई को कड़े मौद्रिक कदम जैसे ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उम्मीद है कि विकास को ध्यान में रखते हुए आरबीआई दरों में जल्दबाजी में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन वित्त वर्ष के अंत में कटौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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