उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाने के बाद अब सरकार की तरफ से उनके निलंबन की बात सामने आ रही है।
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाने के बाद अब सरकार की तरफ से उनके निलंबन की बात सामने आ रही है। अपने निलंबन के सवाल पर उनका कहना है कि वे एक दिन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए खुद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां सुनने का दावा किया और UGC के नए नियमों से लेकर शंकराचार्य मामले तक पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
ईमेल से भेजा इस्तीफा, UGC के नए नियमों पर जताई आपत्ति
प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा। उनका कहना था कि यूजीसी के नए नियम जाति आधारित असंतोष को भड़का सकते हैं, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। अग्निहोत्री ने मंगलवार सुबह अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही सेवा से इस्तीफा दे दिया है और इसलिए निलंबन आदेश पर उन्हें कुछ नहीं कहना है।
डीएम कार्यालय में सुनी अपमानजनक टिप्पणी
हालांकि, अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि पिछली रात जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में हुई एक घटना के दौरान, उन्होंने स्पीकर मोड पर एक फोन बातचीत सुनी, जिसमें एक व्यक्ति ने कथित तौर पर जिलाधिकारी सिंह से कहा, "पंडित पागल हो गए हैं, उन्हें पूरी रात बैठाए रखें।" उन्होंने दावा किया कि जैसे ही यह जानकारी पूरे राज्य में फैली, उन्हें कई जिलों से फोन आए और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए आपत्ति जताई।
अपमानजनक फोन कॉल करने वाले की पहचान उजागर करने की मांग
अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय जाने के लिए कहा गया है ताकि पता लगाया जा सके कि किसने फोन किया और ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि, "हम जल्द ही जिलाधिकारी कार्यालय जाकर अपना पक्ष रखेंगे और यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि यह टिप्पणी किसने की।"
तबादले पर कहा- इस्तीफा दे दिया है, नहीं उठता शामली जाने का सवाल
सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, साथ ही जांच के दौरान उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि, "शामली जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि मैंने पहले ही इस्तीफा दे दिया है।"
इस्तीफा टालने के लिए दबाव बनाने का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें अपना इस्तीफा एक दिन या उससे अधिक समय के लिए टालने या लिखित आवेदन देने के बाद छुट्टी पर जाने के लिए मनाने का प्रयास किया गया, जिससे उन्हें पहले निलंबित करने और "मामले को बदलने" का अवसर मिल जाता। उन्होंने दावा किया, "सौभाग्य से, मैं वहां मौजूद था और मैंने खुद बातचीत सुनी।" उन्होंने कहा कि उन्हें इस्तीफा टालने के लिए मनाने के प्रयास किए गए ताकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
देर रात जारी हुए निलंबन आदेश पर उठाए सवाल
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ, तो निलंबन आदेश देर रात जारी किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि व्यवस्था के भीतर "ब्राह्मण-विरोधी पूर्वाग्रह" की धारणा है, और कहा कि ऐसा "टैग" सरकार के साथ जुड़ गया है। आगे की कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले जिलाधिकारी के कार्यालय जाएंगे और मीडिया के माध्यम से भी यह स्पष्ट करने की कोशिश करेंगे कि फोन किसने किया और कथित टिप्पणी किसने की।
UGC के नए नियमों को बताया 'काला कानून'
उन्होंने अपने सरकारी आवास को लगभग खाली कर देने की बात कहते हुए बताया कि वहां से अधिकांश सामान हटा लिया गया है। अग्निहोत्री ने सोमवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को "काला कानून" बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए जारी नए यूजीसी नियमों में संस्थानों से विशेष समितियां गठित करने, हेल्पलाइन शुरू करने और निगरानी दल बनाने को कहा गया है ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों से निपटा जा सके।
मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत विरोध से किया इनकार
अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनसे फ़ोन पर बात की। उन्होंने कहा, "मैं उनका सम्मान करता हूं। इस अलग मुद्दे पर अभी कुछ कहना मेरे लिए उचित नहीं होगा। बातचीत के दौरान मुझे उनका आशीर्वाद मिला।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कोई संदेश देना चाहेंगे, तो अग्निहोत्री ने कहा कि उनका किसी के प्रति कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है।
पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग
अग्निहोत्री ने कहा, "राज्य भर में ब्राह्मण विरोध की एक विशेष विचारधारा व्याप्त है - मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं।" उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश देने की अपील की है। अग्निहोत्री ने कहा कि "जब राज्य तंत्र विफल हो रहा है, तो प्रधानमंत्री को स्वयं एक एसआईटी का गठन करना चाहिए।"
जातिसूचक टिप्पणी करने वाले का चेहरा सामने लाने की मांग
उन्होंने कहा, "अगर किसी जिला मजिस्ट्रेट से इस तरह बात की जा रही है, तो सबसे पहले उस व्यक्ति (फोन पर दूसरी तरफ मौजूद) की पहचान उजागर की जानी चाहिए जिसने कहा कि 'पंडित पागल हो गए हैं'। यह स्पष्ट रूप से उस व्यक्ति के ब्राह्मणों के प्रति पूर्वाग्रह को दर्शाता है।"
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