नई दिल्ली/जबलपुर। केंद्र सरकार ने किसानों के लिए विशेष तैयारी की है। इससे AI क्रांति की शुरूआत होगी।
नई दिल्ली/जबलपुर। केंद्र सरकार ने किसानों के लिए विशेष तैयारी की है। इससे AI क्रांति की शुरूआत होगी। भारतीय कृषि क्षेत्र में तकनीक का विस्तार करते हुए 'भारत-विस्तार' (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) नाम का एक अत्याधुनिक AI-पावर्ड टूल लॉन्च करने की घोषणा की है। बजट 2026 में घोषित इस पहल को 17 फरवरी 2026 आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जा रहा है। इससे मप्र के किसान भी लाभान्वित होंगे। सरकार के 'इंडिया एआई मिशन' (IndiaAI Mission) ने वैश्विक स्तर पर देश की गंभीर प्राथमिकताओं का संकेत दिया है। लगभग ₹10,372 करोड़ के बजट वाला यह मिशन भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक नई शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। 16 से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस समिट में दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता और टेक दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं। भारत यहाँ "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की थीम के साथ एआई को जन-कल्याण और समावेशी विकास के उपकरण के रूप में पेश कर रहा है।
मिशन के तहत 10,000 से अधिक जीपीयू (GPUs) का एक विशाल कंप्यूटिंग ग्रिड बनाया जा रहा है, जो स्टार्टअप्स के लिए एआई विकास को सस्ता बनाएगा। भारत पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय एआई समिट की मेजबानी कर रहा है, जिससे वह विकासशील देशों (Global South) की आवाज बनकर उभर रहा है।
किसानों को उनकी भाषा में जानकारी
बहुभाषी सुविधा पूरी तरह AI पर आधारित है जिसे किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में जानकारी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। किसान इस सुविधा का लाभ अपने स्मार्टफोन या एक साधारण फोन कॉल (हेल्पलाइन नंबर: 155261) से उठा सकते हैं। इस सिस्टम के भीतर एक टॉकिंग AI असिस्टेंट है जिसका नाम 'भारती' रखा गया है। यह किसानों के सवालों के जवाब एक विशेषज्ञ की तरह देगा।
यह है योजनाएं
इससे PM-किसान, फसल बीमा योजना, और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी 10 प्रमुख केंद्रीय योजनाओं की जानकारी और आवेदन की स्थिति मिलेगी। मौसम का पूर्वानुमान, मंडी भाव, कीट नियंत्रण और आधुनिक खेती की वैज्ञानिक तकनीकें भी जान सकेंगे। यह टूल 'एग्रीस्टैक' और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डेटा को आपस में जोड़ता है, जिससे किसानों को सटीक और प्रमाणित जानकारी देगा।
150 करोड़ का बजट, जोखिम कम करेगा
सरकार ने इस परियोजना के लिए अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इसका उद्देश्य न केवल उत्पादकता बढ़ाना है, बल्कि खेती से जुड़े जोखिमों को कम करना और किसानों के निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाना है। शुरुआत में यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगी, जिसे धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी विस्तारित किया जाएगा। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत ने मिशन के लिए जितनी राशि आवंटित की है, वह लगभग उतनी ही है जितनी 'ओपनएआई' जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियां महज छह महीने में खर्च कर देती हैं। यह भारत के सीमित संसाधनों में अधिकतम प्रभाव पैदा करने के इरादे को दर्शाता है।
समिट के दौरान 'BharatGen' पहल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह भारत का अपना स्वदेशी 'मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल' (LLM) है। इसका उद्देश्य भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में एआई सेवाएं प्रदान करना है, ताकि डिजिटल अंतर को कम किया जा सके।
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