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बाघों की मौत का रहस्य बरकरार

बांधवगढ़ में 8 बाघों की मौत पर सवाल, 52 दिन बाद भी SIT रिपोर्ट नहीं

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बांधवगढ़ में 8 बाघों की मौत पर सवाल 52 दिन बाद भी sit रिपोर्ट नहीं

Bandhavgarh Tiger Deaths Probe Delayed |

बाधवगढ़। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 बाघों की मौत की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) समय सीमा बीत जाने के बावजूद अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सका है।

21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच 8 बाघों की मौत

21 नवंबर 2025 से 2 फरवरी 2026 के बीच 8 बाघों की मौत हुई थी। SIT को 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन 52 दिन बाद भी रिपोर्ट वन मुख्यालय नहीं पहुँची है। यह मामला वर्तमान में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है।विभाग ने 4 मौतें प्राकृतिक बताई हैं, जबकि 4 अन्य की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है।

विभाग की चुप्पी वSIT की सुस्ती

बाघों की इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों के बाद राज्य सरकार ने एक SIT (Special Investigation Team) का गठन किया था। तत्कालीन वन बल प्रमुख ने इस टीम को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। हालांकि, लगभग दो महीने (52 दिन) बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट न आने से वन विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

मौतों के कारण

हाई कोर्ट में पेश की गई शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिजर्व के अंदर (4 मौतें) जिसमें 2 बाघों की मौत आपसी संघर्ष (Territorial Fight) में हुई, एक बाघ कुएं में डूब गया और एक बीमारी का शिकार हुआ। इसके साथ रिजर्व के बाहर (4 मौतें) हुई है। सामान्य वन क्षेत्रों में बिजली की तारों (Electrocution) के संपर्क में आने से 4 बाघों की जान चली गई, जो सुरक्षा और निगरानी में बड़ी चूक को दर्शाता है।

हाई कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे द्वारा दायर याचिका के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने फील्ड डायरेक्टर से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को होनी है। मध्य प्रदेश, जिसे 'टाइगर स्टेट' कहा जाता है, वहां 2025 में 54 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। 2026 की शुरुआत में ही बांधवगढ़ में हुई ये मौतें संरक्षण प्रयासों की विफलता की ओर इशारा करती हैं।

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