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बंगाल में राज्यपाल बनाम टीएमसी टकराव तेज

बंगाल में सियासी टकराव तेज: राज्यपाल के बयान पर टीएमसी का हमला, ममता का ‘लाटसाहेब’ तंज

राज्यपाल आरएन रवि के बयान पर टीएमसी भड़की, भाजपा की भाषा बोलने का आरोप; बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी से सियासी विवाद तेज हुआ।

बंगाल में सियासी टकराव तेज राज्यपाल के बयान पर टीएमसी का हमला ममता का ‘लाटसाहेब’ तंज

Raj Bhavan controversy |

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में टीएमसी राज्यपाल आरएन रवि के विरोध में खुल कर सामने आ गई है। राज्यपाल आरएन रवि ने राजभवन में बांग्ला नव वर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य की खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया और राज्य की मौजूदा स्थिति को संतोषजनक नहीं बताया। यह बयान टीएमसी को खल गया और उसने राज्यपाल पर भाजपा की बोली बोलने का आरोप लगाया है।

ममता बनर्जी का ‘लाटसाहेब’ तंज

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल आरएन रवि का नाम लिए बिना उत्तर दिनाजपुर के इसलामपुर में टीएमसी की चुनावी सभा में उन्हें बड़े भवन में रहने वाले “लाटसाहेब” बताया। उन्होंने कहा कि बांग्ला नव वर्ष के मौके पर शुभकामनाएं देने के बजाय उनकी आलोचना की जा रही है।

टीएमसी नेताओं का तीखा आरोप

टीएमसी के अन्य नेताओं ने भी राज्यपाल पर भाजपा की भाषा बोलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राज्यपाल को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन उनके बयान राजनीतिक पक्षपात को दर्शाते हैं।

राज्यपाल ने जताई आर्थिक और शैक्षणिक चिंता

राज्यपाल आरएन रवि ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल कभी देश के अग्रणी आर्थिक और बौद्धिक केंद्रों में शामिल था, लेकिन वर्तमान में स्थिति वैसी नहीं है। उन्होंने राज्य की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

बंगाल की घटती आर्थिक हिस्सेदारी पर टिप्पणी

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के समय और उसके बाद के दशकों में पश्चिम बंगाल देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में था। 1960 के दशक में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में राज्य का योगदान 10 प्रतिशत से अधिक था, जबकि उस समय तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात इतने आगे नहीं थे।

प्रति व्यक्ति आय में पिछड़ने की बात

राज्यपाल ने कहा कि 1980 के दशक में देश में केवल चार राज्य प्रति व्यक्ति आय के मामले में आगे थे, लेकिन अब 15 राज्य पश्चिम बंगाल से आगे निकल चुके हैं।

‘फिर से जागने’ की अपील

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आय में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत से घटकर करीब पांच प्रतिशत रह गई है। राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को फिर से जागना होगा और अपनी खोई हुई विरासत को पुनः हासिल करना होगा।

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