कोलकाता: पश्चिम बंगाल में वोटर जांच कर रहे न्यायिक अधिकारियों को मिल रही धमकियों पर चीफ जस्टिस सुजय पाल ने नाराजगी जताई, सुरक्षा के निर्देश दिए।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विचाराधीन वोटरों के कागजातों की जांच कर रहे न्यायिक अधिकारियों (सेवानिवृत्त जज) को मिल रही धमकियों को मद्देनजर Calcutta High Court के चीफ जस्टिस Sujay Paul ने नाराजगी जताई और डीजीपी Siddhinath Gupta को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करने का आदेश दिया है।
अधिकारियों को मिल रही धमकियां
सूत्रों के मुताबिक कई न्यायिक अधिकारियों ने चीफ जस्टिस से शिकायत की है कि उन्हें कागजातों की जांच के दौरान किसी भी वोटर का नाम नहीं हटाने के लिए धमकी दी जा रही है। न्यायिक अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है।
कई जिलों में सामने आए मामले
राज्य के विभिन्न जिलों—Cooch Behar, South 24 Parganas, Murshidabad, Malda—में अज्ञात लोगों द्वारा धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं। उत्तर बंगाल में एक महिला न्यायिक अधिकारी को धमकी दी गई, जबकि उत्तर 24 परगना में एक अधिकारी के वाहन का पीछा किया गया।
सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
कूचबिहार के एसपी Jasprit Singh ने कहा कि उनके जिले में सुरक्षा में कोई कमी नहीं रखी गई है। वहीं चीफ जस्टिस ने सभी शिकायतें डीजीपी को सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना किसी दबाव के अपना काम पूरा कर सकें।
बड़ी संख्या में हो रही जांच
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाई कोर्ट की निगरानी में करीब 60 लाख विचाराधीन वोटरों के कागजातों की जांच की जा रही है। लगभग 700 न्यायिक अधिकारी इस प्रक्रिया में लगे हैं, जिनमें से 200 झारखंड और ओडिशा से हैं।
समय सीमा और अब तक की प्रगति
6 अप्रैल तक सभी मामलों का निपटारा किया जाना है। अब तक करीब 39 लाख मामलों की जांच हो चुकी है, जबकि लगभग 20 लाख नाम जारी किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 40% नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिसके बाद कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है।
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