जबलपुर। हाईकोर्ट में चल रहे एक आपराधिक अवमानना के मामले में मंगलवार को भाजपा विधायक संजय पाठक...
जबलपुर। हाईकोर्ट में चल रहे एक आपराधिक अवमानना के मामले में मंगलवार को भाजपा विधायक संजय पाठक अदालत में पेश हुए। कटनी के याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए आवेदन दिया था, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं
कोर्ट का रुख: चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सरफ की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला 'स्वतः संज्ञान' (suo motu) का है, इसलिए इसमें किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मामले में सहायता करने की छूट दी है।
अधिवक्ता पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत कामत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए दलील दी कि विधायक संजय पाठक द्वारा प्रस्तुत माफीनामा (हलफनामा) फर्जी है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या आपने हलफनामा पढ़ा है? कोर्ट ने कहा कि बिना आधार के इस तरह के गंभीर आरोप नहीं लगाए जा सकते। कोर्ट ने विधायक को अगली सुनवाई (14 मई) में फिर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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