डिंडौरी। जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे-45 पर शनिवार और रविवार की दरमियानी रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा हुआ।
डिंडौरी। जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे-45 पर शनिवार और रविवार की दरमियानी रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा हुआ। गाड़ासरई थाना क्षेत्र के किकरा तालाब के पास एक बेकाबू कैप्सूल टैंकर ने सड़क किनारे खड़े 6 लोगों को बेरहमी से कुचल दिया। इस भीषण टक्कर में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है।
ड्रायवर टायर बदल रहा था, बाकी खड़े थे
हादसे का शिकार हुए लोग एक ही परिवार के सदस्य और रिश्तेदार थे, जो सिलियारी गांव में एक 'चौक' कार्यक्रम में शामिल होकर पिकअप वाहन से अपने घर लौट रहे थे। रात करीब 12:30 से 1:00 बजे के बीच उनके वाहन का टायर पंक्चर हो गया। ड्राइवर टायर बदल रहा था और बाकी लोग नीचे उतरकर सड़क किनारे इंतजार कर रहे थे।
कैप्सूल टैंकर ने चपेट में लिया
तभी अमरकंटक की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार कैप्सूल टैंकर ने इन्हें अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टैंकर की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह लोगों को रौंदते हुए करीब 300 मीटर आगे जाकर रुका। इस दौरान टैंकर ने एक बिजली के खंभे, यात्री प्रतीक्षालय और एक मंदिर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
टॉयलेट करने गये एकमात्र सदस्य बचा
हादसे में एकमात्र जीवित बचे घायल युवक उदय प्रताप (20 वर्ष) ने जिला अस्पताल में आपबीती सुनाई। उसने बताया कि वह गाड़ी से उतरकर सड़क से थोड़ा दूर टॉयलेट करने गया था। इसी 10 मिनट के अंतराल में मौत का तांडव हुआ। अगर वह वापस आ गया होता, तो शायद वह भी जिंदा नहीं बचता।
हादसे में मृतकों की पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले सभी मृतक परसवाह, करबे मट्टा और उफरी गांव के निवासी थे। इसमें पवन कुमार मरावी (32), राजकरण मरावी/वनवासी (30), बिसाहू लाल (जिन्हें बिसारी सिंह भी बताया गया), विशाल सिंह धुर्वे (58), पवन सिंह उइके (52) शामिल हैं।
मौके पर पहुंचे कलेक्टर
घटना की सूचना मिलते ही डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और एसपी वाहिनी सिंह मौके पर पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को 4.5 लाख रुपये (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 4 लाख) की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। पुलिस ने आरोपी टैंकर ड्राइवर राजेश पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। चश्मदीदों का कहना था कि हादसा इतना वीभत्स था कि शवों के चीथड़े उड़ गए थे। अपनों की पहचान करना तक मुश्किल हो गया था, पुलिस और ग्रामीणों को कपड़ों में शवों को समेटना पड़ा।
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